क्या बदलेगा आम आदमी पार्टी का संयोजक ? Nachiketa Live की ख़ास पेशकस

क्या बदलेगा आम आदमी पार्टी का संयोजक

साल 2012 , नवम्बर 26 , देश में बनती है एक नई राजनैतिक पार्टी .. यूँ तो हर साल नई नई राजनैतिक पार्टियाँ बनती ही रहती है लेकिन इस पार्टी कि चर्चा कुछ ज्यादा ही थी क्योंकि ये पार्टी बनी थी अन्ना आन्दोलन से . वही अन्ना आन्दोलन जिसने भ्रस्टाचार के खिलाफ लोकपाल कानून कि मांग को लेकर कांग्रेस सरकार कि चूले हिला दी थी .

जी हाँ हम बात कर रहे हैं आम आदमी पार्टी कि और आप देख रहे नचिकेता लाइव और मैं हूँ मनीष कुमार . . आम आदमी पार्टी जब बनी थी तो बड़े बड़े वायदे किए गये थे और कहा गया था हम राजनीति करने नही बदलने आये हैं . और इस पार्टी कि कमान सौंपी गयी थी अरविन्द केजरीवाल को . मतलबी बड़े बड़े दिग्ग्ज्जों से सजी पार्टी में सबने अरविन्द केजरीवाल को अपना नेता चुना और पार्टी का संयोजक बनाया गया .

इस पार्टी का संविधान लिखा शांति भूषण ने . शांति भूषण जाने माने वकील और प्रशांत भूषण के पिता हैं. आपको बता दे कि जब भी कोई पार्टी बनती है तो उसका एक संविधान बनता है और वो चुनाव आयोग में भी जाता है और कानूनों के मुताबिक इस संविधान का पालन हर राजनातिक पार्टी को करना होता है लेकिन कोई राजनातिक पार्टी कानूनों का कितना पालन करती है ये तो आप सबको पता ही है लेकिन आम आदमी पार्टी से उमीद की जा रही थी कि ये पार्टी शायद अपने संविधान का पालन करेगी क्योंकि ये राजनीति में नये लोग थे .]

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हालाकिं समय गुजरने के साथ साथ संविधान बनाने वाले शांति भूषण और उनके बेटे प्रशांत भूषण को ही इस पार्टी से निकाल दिया गया और इसके साथ ही ये पार्ट्री भी चल पड़ी उसी राजनातिक ढर्रे पर जिसपर हमेशा से राजनैतिक पार्टियाँ चलती आई है .
आम आदमी पार्टी में संयोजक 3 साल के लिए चुना जाता है , पार्ट्री बंनने से लेकर अब तक पिछले ६ साल से अरविन्द केजरीवाल ही पार्टी संयोजक है , इसका मतलब है वो अपने 2 कार्यकाल पुरे कर चुके हैं , और पार्टी के संविधान में लिखा है कोई भी पदाधिकारी 2 बार से ज्यादा एक पद पर नही रह सकता . लेकिन अरविन्द केजरीवाल अभी भी संयोजक पद पर बने हुए हैं .

हमने यह भी पता किया कि कहीं पार्टी का संविधान न बदल दिया हो और इसका पता करने के लिए हमने आम आदमी पार्टी कि वेबसाइट से पार्टी के संविधान को दोबारा डाउनलोड किया जिसमे भी साफ़ साफ़ लिखा था कि एक पदाधिकारी अपने पद पर 2 बार से ज्यादा नही रह सकता .
शायद आम आदमी पार्टी में अब ये सवाल कोई कर भी नही रहा है क्योंकि इस पार्टी में सवाल करने कि सजा क्या होती है वो पार्ट्री के लोग योगेंदर यादव , प्रशांत भूषण ,कुमार विश्वास को देखकर जान ही चुके हैं .

अब अरविन्द केजरीवाल पार्टी के सुप्रीमो बन चुके हैं तो उनकी मर्जी है वो जब तक चाहे संयोजक बने रहे लेकिंन एक बात तो साफ़ है इस आन्दोलन से निकली पार्टी का हस्र देखकर इस देश के लोग अगले कई सालों तक किसी आन्दोलन पर भरोसा शायद ही कर पायेंगे .

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