आखिर क्यों हंसने लगा मेघनाथ का कटा हुआ सिर?

मेघनाथ

क्या आप जानते हैं कि, रावण का पुत्र मेघनाथ एक सर्वशक्तिशाली व्यक्ति था, औऱ मरने के बाद भी उसके शरीर का कुछ हिस्सा जिंदा रह गया था, जिसे देख देवताओं के भी होश उड़ गए थे। जी हां…दरअसल मेघनाथ के मरने के बाद कुछ ऐसा हुआ था कि उसका सिर जोर जोर से हंसने लगा, इस भयानक तस्वीर को देखकर देवताओं के भी पैरों तले ज़मीन खिसक गई थी।

सर्वशक्तिशाली था मेघनाथ

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित हिंदू धर्म का महाग्रंथ रामायण तो सभी ने देखी और पढ़ी भी होगी, लेकिन रामायण में कुछ ऐसी भी घटनाएं हुई थी जिसके पीछे का कारण लोगों ने जानने की कोशिश नहीं कि, उनमें से एक घटना है मेघनाथ की मृत्यु का रहस्य। दरअसल रावण का पुत्र मेघनाथ जिसका नाम इंद्रजीत भी था, वो बहुत शक्तिशाली था। दोनों नाम उसकी बहादुरी के लिए ही दिए गए थे। इंद्र पर जीत हासिल करने के कारण मेघनाथ को इंद्रजीत नाम से पुकारा गया था। इसके अलावा मेघनाथ हमेशा बादलों में छुप कर युद्ध किया करता था, जिसके कारण कोई भी उसपर प्रहार नहीं कर पाता था, इसलिए उसका नाम मेघनाथ यानी मेघो की आड़ में युद्ध करने वाला रखा गया था।

क्यों हंसने लगा था मेघनाथ का कटा हुआ सिर?

दरअसल रामायण में दिखाया गया है कि रावण का सर्वशक्तिशाली पुत्र मेघनाथ की मृत्यु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के भाई लक्ष्मण के हाथों हुई थी, और ये घटना पहले से ही लिखी गई थी। लेकिन मृत्यु हो जाने के बाद अचानक ही मेघनाथ का कटा हुआ सिर हंसने लगा, इसके पीछे कारण ये था कि, मेघनाथ से युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी ने अपने भारी बाणों से मेघनाथ का धर उसके सिर से अलग कर दिया, जिसके बाद इंद्रजीत यानि मेघनाथ की मृत्यु हो गई। इस दौरान मेघनाथ के कटे हुए सिर को भगवान श्री राम के आगे रखा गया था।

जब सुलोचना के पास पहुंचा मेघनाथ का कटा हुआ धर

मेघनाथ

भगवान राम ने वानर सेना से कहा कि, मेघनाथ का सिर संभाल कर रखा जाए, क्योंकि भगवान राम मेघनाथ का सिर उसकी पत्नी सुलोचना को देना चाहते थे। भगवान राम ने मेघनाथ की एक भुजा को वानरों के हाथों रावण के महल में पहुंचवा दिया, वो भुजा जब मेघनाथ की पत्नी सुलोचना ने देखे तो उसे विश्वास नहीं हुआ कि सर्वशक्तिशाली होने के बाद भी उसके पति की मौत हो गई है।

ऐसे में मेघनाथ की पत्नी ने कटे हुए भुजा से कहा कि अगर तुम वास्तव में मेरे स्वामी मेघनाथ की भुजा हो तो मेरी चिंता को लिखकर दूर करो। सुलोचना के ऐसा कहते ही मेघनाथ की भुजा उठ गई और कटे हुए हाथ से ही आंगन में लक्ष्मण जी की बहादुरी की प्रशंसा लिखकर बताने लगी, ये सब देख सुलोचना को विश्वास हो गया कि उसका पति अब मारा गया है।

भगवान राम के पास पहुंची सुलोचना

पति की मौत के बाद सुलोचना भगवान राम के पास पहुंची और कहा कि हे राम मैं आपकी शरण मे आई हूं, आप मेरे पति का सर मुझे लौटा दें ताकि मैं सती हो जाऊं। सुलोचना की दयानिय दशा को देखकर राम को काफी दुख हुआ।  सुलोचना ने आंगन में हुई सारी घटना बताई लेकिन सुग्रीव और वहां मौजूद वानर सेना को सुलोचना की बात पर भरोसा नहीं हुआ, तब सुग्रीव ने कहा कि मैं इस बात को तब सच मानूंगा जब मेघनाथ का कटा हुआ सिर हंसने लगेगा। ये सुलोचना की परिक्षा की घड़ी थी उसने कहा कि हे स्वामी कृप्पा करके हंसीए वरना मैं झूठी साबित हो जाउंगी।

सुलोचना की बात सुनते ही मेघनाथ का कटा हुआ सिर जोर जोर से हंसने लगा। ये घटना देख दवताओं के होश उड़ गए, उन्हे सुलोचना की बातों पर भरोसा हो गया। इसके बाद सुलोचना अपने पति मेघनाथ का सिर वापस लेकर लौट गई।

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