थायराइड (Thyroid) के प्रकार, लक्षण और बचाव के उपाय

लोगों में थायराइड (Thyroid) की बीमारी पहले के मुकाबले अब बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है। इस बीमारी में अक्सर वजन बढऩे के साथ ही हार्मोन भी असंतुलित हो जाते हैं। एक स्टडी के मुताबिक, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये समस्या होने की संभावना दस गुना ज्यादा होती है। महिलाओं में ऑटोम्यून्यून की समस्या ज्यादा होना इसका मुख्य कारण है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो Thyroid Hormone शरीर के अंगों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं। इसकी परेशानी Thyroid Gland (ग्रंथि) के बढऩे के कारण होती है। इस बीमारी को एक साइलेंट किलर भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण जल्दी से सामने नहीं आते।

क्या है थायराइड?

ये तितली के आकार की एक ग्रंथि है, जो गर्दन के अंदर और कॉलरबोन के ठीक ऊपर होती है। यह एक प्रकार की एंडोक्राइन ग्रंथि (नलिकाहीन ग्रन्थियां) है, जो हार्मोन बनाती है। थायराइड ग्रंथि टी3 व टी4 थायरॉक्सिन हार्मोन का निर्माण करती है। ये ह्दय, सांस, पाचन-तंत्र और शरीर के तापमान पर सीधा असर करती है। इसके साथ ही ये मांसपेशियों और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करती है। शरीर में जब ये सभी हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं और शरीर में वजन बढऩे या कम होने की परेशानी होने लगती है, तो इसे थायरॉइड कहते है।

थायराइड के प्रकार

Thyroid Hormone मेटाबोलिक रेट, भोजन ग्रहण करने और थर्मोजेनेसिस को कंट्रोल करता है। इसको मुख्यता 2 प्रकार में बांटा गया है –

हाइपरथायराइडिज्‍म

इसमें हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनने लगता है। हाइपर-थायराइडिज्‍म में टी3 और टी4 का स्‍तर बढ़ने और टीएसएच का स्‍तर घटने लगता है। हाइपरथायराइडिजम, कभी-कभी Thyroid ग्रंथि की सूजन के कारण स्‍थायी तौर पर भी हो सकता है।

हाइपोथाइराडिज्‍म

इसमें Thyroid Hormone कम बनते हैं। टी3 और टी4 का सीरम लेवल घटने लगता है और फिर टीएसएच का स्‍तर बढ़ता रहता है।

थायराइड से जुड़ी सामान्‍य समस्‍याएं

1. हाइपरथायराइडिज्‍म: इसमें थायराइड ग्रंथ के ज्यादा सक्रिय होने के कारण हार्मोन का बहुत ज्यादा स्राव होने लगता है।

2. हाइपोथायराइडिज्‍म: इसमें थायराइड ग्रंथि सामान्‍य से कम हार्मोन का स्राव करती है।

3. थायराइड कैंसर: थायराइड कैंसर ही एंडोक्राइन ट्यूमर का सबसे खतरनाक रूप होता है। ऊतकों के आधार पर थायराइड कैंसर को 2 प्रकार में वर्गीकृत किया गया है –

i. डिफरेंशियल थायराइड कैंसर:
डिफरेंशियल थायराइड कैंसर किसी भी Thyroid Cancer का सबसे सामान्‍य रूप है जो पैपिलरी थायराइड कैंसर और फॉलिक्युलर थायराइड कैंसर के एक साथ होने पर डिफरेंशियल थायराइड कैंसर होता है। ये कैंसर उपकला या एपिथीलियमी कोशिकाओं से होता है

ii. ऐनाप्लास्टिक थायराइड कैंसर:
ऐनाप्लास्टिक थायराइड कैंसर में नई तरह की कोशिकाएं विकसित हो जाती हैं जो थायरॉइड ऊतकों से बिलकुल अलग होते हैं। ये एक दुर्लभ और तेज़ी से बढ़ने वाला कैंसर है जिसका इलाज बहुत मुश्किल है। सिर्फ 2 फीसदी कैंसर ही ऐनाप्लास्टिक थायरॉइड कैंसर होता है। यह कैंसर आमतौर पर 60 या उससे अधिक उम्र के लोगों में पाया जाता है।

थायराइड के लक्षण

ये एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण शुरुआत में जल्दी पता नहीं चल पाते । वैसे महिलाओं को होने पर सुस्ती, थकान, कब्ज और स्किन पर रुखेपन की समस्याएं होने लगती है। इतना ही नहीं इसकी वजह से महिलाओं में पीरियड्स भी अनियमित होने लगते हैं।

वैसे इसके लक्षण में सबसे मुख्य बात शरीर का वजन लगातार घटना या बढऩा ही है। इसके अलावा अनिंद्रा, ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा पसीना, हाथ कांपना, दिल का तेजी से धड़कना, कमजोरी और चिंता होना भी इसके लक्ष्ण हैं। इसके कारण मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द की समस्या भी होने लगती है।

थायराइड से बचाव

यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर इसकी सही समय पर जांच कर ली जाए। हालांकि कई बार उपचार के बाद भी ये बीमारी पूरी तरह से ठीक नहीं पाती। इसलिए एक बार इसका उपचार करवाने के बाद भी समय-समय पर इसकी जांच करनी पड़ती है। वैसे ज्यादातर मामलों में इसका इलाज संभव है।

1. इससे बचाने का सबसे आसान तरीका है योग से जा सकता है। कपालभाती करने से इसकी समस्या से मुक्ति मिल जाती है।

2. इसके ज्यादातर मामलों में इससे संक्रमित जगह को निकालने की सर्जरी की जाती है। बाद में बची हुई कोशिकाओं को खत्म करने या दोबारा इसकी समस्या के होने पर रेडियोएक्टिव आयोडीन से उपचार किया जाता है।

3. इसे सर्जरी के माध्यम से हटाते हैं लेकिन उसकी जगह मरीज को हमेशा Thyroid रिप्लेसमेंट हार्मोन लेने ही पड़ते हैं।

4. इसकी सर्जरी के बाद मरीज के लिए रेडियोएक्टिव आयोडीन की खुराक बहुत जरूरी होती है क्योंकि ये कैंसर की सूक्ष्म कोशिकाओं को मार देती है। इसके अलावा, ल्यूटेटियम ऑक्ट्रियोटाइड उपचार से भी इसका इलाज किया जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके लक्षणों को नजरअंदाज करने पर, ये बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसलिए इसके लक्षण दिखनें पर तुरंत ही डॉक्टर से इलाज कराएं, क्योंकि अगर एक बार थायराइड बिगड़ जाए तो यह शरीर पर घातक भी हो सकता है।

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