बच्चों में तेज़ी से फैल रहा है आई कैंसर अंगूर के बीज देंगे मौत को भी मात

बीमारियों की बात करें तो हर बीमारी खतरनाक होती है लेकिन जब भी बात कैंसर की आती है तो मन में एक अलग सा डर पैदा हो जाता है, औऱ ऐसा इसलिए क्योंकि कैंसर का इलाज जितना मुश्किल है उससे कई ज़्यादा महंगा भी है, एक साधारण व्यक्ति कैंसर जैसी बीमारी का इलाज करवाने से अच्छा मरना पसंद करेगा। चिंता की बात तो ये है कि इन दिनों आई कैंसर का खतरा भी काफी बढ़ गया है।

तो आज की इस वीडियो में हम आपको आंखे के कैंसर के बारे में बताएंगे, साथ ही ये भी बताएंगे की ये खतरनाक बीमारी किस उम्र में ज्यादा होती है, तो वीडियो को अंत तक ज़रूर देखें।

कैसे मिलता है आई कैंसर का संकेत?

दरअसल इन दिनों आई कैंसर का खतरा काफी बढ़ गया है, और ऐसा नहीं है कि ये बिमारी केवल बड़े- बुजुर्गों में देखने को मिलेगी, बल्कि बच्चों में भी आई कैंसर होना आम हो गया है। अक्सर हम धुंधला नज़र आने और पलकों पर गांठ आने जैसी समयाओं को नज़रंदाज़ कर देते हैं लेकिन असल में ये आई कैंसर का संकेत भी हो सकती हैं। ऐसे में हमें समय पर आँखों के कैंसर का पता लगाना होगा जिससे ये दिक्कत और ना बढ़े और समय रहते इसका इलाज हो सके।

क्या होता है आंखों का कैंसर?

आंखों की कोशिकाएं अचानक से बढ़ जाती हैं और आंखों के ऊपर गांठ सा बनने लगता है इस स्थिति को ही आंखों का कैंसर कहते हैं। इसके अलावा आंखों के सेल्स में अचानक ही तेज़ी से बढ़ोतरी हो जाती है जिसके कारण सेल्स चारों ओर फैल जाती है। आंखों में बनने वाले कैंसर की वजह से आंखों का आउटर पार्ट ज़्यादा प्रभावित होता है और देखने में तकलीफ होने लगती है। आंखों का वो कैंसर जिससे आउटर पार्ट प्रभावित होता हो उसे मेलेनोमा कैंसर भी कहते हैं।
इसके साथ ही आईबॉल के अंदर होने वाले कैंसर को इंट्राऑकुलर कैंसर कहते हैं। इतना ही नहीं आंखों में कई और तरह के भी कैंसर पनपते हैं जो आंखों के सेल्स को अलग-अलग तरह से प्रभावित करते हैं जिससे रौशनी गायब होने लगती है। यहां तक कि ये कैंसर अब बच्चों की आंखों में भी देखने को मिलने लगा है।

रेटीनोब्लास्टोमा बच्चों में होने वाला कॉमन आई कैंसर माना जाता है, ये छोटे बच्चों की आंखों को बड़ी जल्दी औऱ तेज़ी से प्रभावित करता है। जिससे आंखों के रेटीना सेल्स इन्फ्लुएंस हो जाती हैं। वैसे तो आंखों के कैंसर बहुत कम ही सुनने को मिलते हैं लेकिन प्रदूषण और केमिकल के संपर्क में ज्यादा रहने के कारण ये समस्या होना कोई बड़ी बात नहीं है। इस बिमारी की चपेट में आने के बाद आप बड़ी ही आसानी से अपने आंखों की रौशनी खो सकते हैं।

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आई कैंसर के लक्षणों की बात करें तो इसे पहचानने के लिए कुछ चीज़ों का खास ध्यान रखना ज़रूरी है, क्योंकि आंखों के कैंसर भी कई प्रकार के होते हैं।
जब कोई व्यक्ति आई कैंसर से प्रभावित होता है तो उसे बिना किसी दर्द औऱ बिना किसी समस्या के ही देखने में परेशानी होने लगती है। इसके अलावा आंखों में रौशनी दिखना और बेवजह की परछाई नजर आना भी आई कैंसर के लक्षण हैं। इसके साथ ही आंखों के अंदर का हिस्सा ऊपर की ओर उठा हुआ दिखना औऱ आंखों की पलकों पर गांठ दिखना भी आई कैंसर के लक्षण हैं। और जब आपको धुंधला दिखना या धुंधली नज़र के साथ धब्बे-धब्बे दिखने लगे तो समझ जाएं की आपकी आंखों में कोई गंभीर बिमारी पैदा हो रही है।

क्यों होता है आई कैंसर?

आई कैंसर क्यों होता है इस बारे में अभी कोई ठोस कारण का पता नहीं लग सका है लेकिन कई एक्सपर्ट औऱ डॉक्टरों का कहना है कि, डीएनए में कमी और इन्फ्लुएंस्ड हेल्दी सेल्स आँखों के कैंसर का कारण बन जाते हैं।

अगर इस बिमारी के इलाज की बात करें तो अभी तक इसकी कोई दवा नहीं बन पाई है। केवल सावधानियों औऱ डॉक्टर्स की सलाह से ही इस खतरनाक बिमारी से बचा जा सकता है। आंखों का कैंसर 50 से 60 साल के लोगों को ज्यादा होता है, ऐसे में उन्हे खास ध्यान रखने की ज़रूरत है। जैसे बाहर जाते समय चश्मा पहनें, आंखों में डायरेक्ट पड़ने वाली धूप से बचना चाहिए। इसके अलावा हरी साग सब्जियां खाना भी आंखों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।

इसके साथ ही शोध में ये भी साबित हो चुका है कि अंगूर के बीज सिर्फ 48 घंटे में हर तरह के कैंसर को 76 प्रतिशत तक कमजोर कर सकता है। अमेरिकन एसोसिएशन के एक कैंसर रिसर्च के अनुसार अंगूर के बीज में पाया जाने वाला जेएनके प्रोटीन, कैंसर कोशिकाओं के अंशों को काबू में करने का काम करता है, कैंसर में अंगूर के बीज प्राकृतिक तौर पर अपनाई जाने वाली एक रामबाण घरेलू दवा है। इस इलाज से 25 प्रतिशत मरीज स्वस्थ हो जाते हैं।

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