साइनस (Sinus) के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

साइनस (Sinus)
बदलते मौसम में अक्सर लोगों को जुकाम और बुखार होने लगता है , लेकिन कई बार जुकाम-बुखार के साथ-साथ छींक, सिर दर्द और नाक बंद जैसी कई परेशानियां भी हो जाती हैं। जो कि साइनस (Sinus) या साइनोसाइटिस का संकेत हो सकती हैं।

साइनस क्या है ?

आमतौर पर इसे लोग सांस की बीमारी या इंफेक्शन से होने वाली बीमारी समझ लेते हैं, जबकि ये नाक में होने वाली एक गंभीर बीमारी है। इसमें नाक की हड्डी बढ़कर तिरछी हो जाती है और सांस लेने में दिक्कत होती है। अगर साइनस से पीड़ित व्यक्ति ठंडी हवा, धूल और धुएं के संपर्क में आए तो उसकी परेशानी बढ़ जाती है।
यह मानव की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती है। जो हमारे सिर को हल्का बनाने और श्वास वाली हवा लाने में मद्द करती है। श्वास लेने में अंदर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है। यह थैली, हवा के साथ आई धूल और दूसरी गंदगी को अंदर जाने से रोकती है। जब किसी व्यक्ति के साइनस का मार्ग रूक जाता है, तो साथ ही बलगम निकलने का मार्ग भी रूक जाता है। इससे साइनोसाइटिस नाम की बीमारी होती है। साइनस का इंफेक्शन होने पर इसकी झिल्ली में सूजन आ जाती है। जिसकी वजह से झिल्ली में जो हवा भरी होती है उसमें मवाद या बलगम भरने लगता है और साइनस (Sinus) बंद हो जाते हैं।

साइनस के प्रकार

एक्यूट साइनस (Acute Sinus)

ये सबसे कम अवधि वाला होता है। एक्यूट साइनस वाइरल इंफेक्शन की वजह से होता है, जो चार या उससे कम हफ्तों तक ही रहता है।

डेविएटेड साइनस (Deviated sinus)

जब ये नाक के एक हिस्से पर होता है, तो उसे डेविएटेड साइनस कहा जाता है। इसके होने पर नाक बंद हो जाती है और व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

क्रॉनिक साइनस (Chronic sinus)

क्रॉनिक साइनस यानी लंबे समय तक रहने वाला साइनस। ये करीब 12 हफ्ते यानी करीब 3 महीने तक रहता हैं। इसका मुख्य कारण एलर्जी, इंफेक्शन, म्यूकस व नाक में सूजन होता है।

हे साइनस (Hay sinus)

हे साइनस को एलर्जी साइनस भी कहते हैं। जिस व्यक्ति को धूल के कणों, पालतू जानवरों या किसी खाने पीने की चीजों से एलर्जी होती है, हेसाइनस उसे ही होता है।

साइनस के कारण

एक्सपर्ट के अनुसार साइनस होने के मुख्य 3 कारण होते हैं लेकिन आजकल प्रदूषण भी इसका एक कारण बन गया है।
1. फंगल इंफेक्शन
2. बैक्टीरिया
3. नाक की हड्डी का ढ़ेडा होना।
4. प्रदूषण

साइनस (Sinus) के लक्षण

1. सिर में तेज दर्द होना
2. खांसी या कफ जमना
3. नाक से कफ आना
4. बुखार रहना
5. दांत में दर्द रहना
6. चेहरे पर सूजन आना
7. साइनस की जगह दबाने पर दर्द
8. कोई गंध न आना
9. नाक से सफेद हरा या फिर पीला कफ निकलना

साइनस के घरेलू उपचार

हालांकि ज्यादातर लोग साइनस की समस्या में एंटीबायोटिक दवाएं लेना ही पसन्द करते हैं,लेकिन वो भूल जाते हैं कि दवाओं से बेहतर हमेशा घरेलू उपचार ही होते हैं। तो चलिए जानते हैं, साइनस के घरेलू उपचार के बारे में-
  1. स्टीम
अगर साइनस की वजह से आपकी नाक ज्यादा बह रही हो, तो ऐसे में स्टीम लेना फायदेमंद होता है । एक बर्तन में गर्म पानी लें। फिर तौलिए ले मुंह ढंक ले। पानी के भाप से नाक पूरी तरह खुल जाएगी और आपको जल्द ही आराम मिलेगा।
2. गर्म लिक्विड
साइनस में गर्म-गर्म लिक्विड पिने से राहत मिलती है। गर्म लिक्विड पीने से बंद नाक खुल जाती है। ध्यान रहे कि साइनस में गलती से भी अल्कोहल नहीं लेना चाहिए।
3. पुदीने, नींबू और लौंग का तेल
आमतौर पर साइनस की समस्या को ठीक करने के लिए पुदीने, नींबू या लौंग के तेल का उपयोग किया जाता है। रोज इन तेलों को गर्म करके सीने, नाक और सिर पर मसाज करने से आराम मिलता है।
4. चेहरे पर गर्म तौलिया रखें
साइनस में अक्सर नाक बंद होती है जिसकी वजह से सिर भारी होने लगता है। ऐसे में गर्म पानी में तौलिया भिगोकर, उससे अपना चेहरा ढंक लेने से आपको जल्दी ही सिर के भारीपन से छुटकारा मिल जाएगा।
5. आराम करें
साइनस से जल्दी छुटकारा पाने के लिए ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए, क्योंकि लगातार बैठने और ज्यादा काम करने से साइनस की परेशानी और बढ़ने लगती है। हो सके तो हर 1 घंटे में आप अपने सीट से उठें और 10 से 15 मिनट के लिए लेट कर आराम करें।

रखें ये सावधानी

साइनस (Sinus) से पीड़ित व्यक्ति के लिए 4 सावधानियों का हमेशा ध्यान रखना और पालन करना लाभदायक होता है।

1. नाक साफ रखना –

साइनस (Sinus) नाक की बीमारी है। इससे पीड़ित व्यक्ति को हमेशा अपनी नाक का खास ध्यान रखना चाहिए यानी कि नाक को साफ रखना चाहिए।
2. ध्रूमपान न करना –
साइनस की बीमारी में वैसे भी सांस लेने में तकलीफ होती है। यदि ऐसे में साइनस से पीड़ित व्यक्ति धूम्रपान करेगा, तो उसकी सायनस की परेशानी और बढ़ जाएगी। इसीलिए हो सके तो धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें।
3. छींकते या खांसते समय टिशू पेपर या रूमाल का उपयोग –
साइनस, वाइरस या बैक्टीरियां से होती है। इसीलिए सभी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि छींकते या खांसते समय किसी टिशू पेपर या रूमाल का इस्तेमाल करें। जिससे किसी दूसरे व्यक्ति तक किसी तरह का कोई वायरस या बैक्टीरिया न फैलें।
4. डॉक्टर के संपर्क में रहना-
इन सबके अलावा भी यदि आपको साइनस की ज्यादा परेशानी हो रही है तो तुरंत ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें, और डॉक्टर द्वारा बताए गए निर्देशों का तुरंत ही पालन करें।

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