श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2020 : जानिए महत्त्व, मुहूर्त और पूजा-विधि

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सनातन परंपरा में अति-विशिष्ट स्थान रखता है। इस दिन भगवान कृष्ण का धरती पर अवतार हुआ था। आइये जानते हैं, इस दिन हम किस प्रकार से भगवान की पूजा से उनकी कृपा पात्र बन सकते हैं…

सभी देवी-देवताओं में भगवान श्रीकृष्ण ही इकलौते ऐसे भगवान हैं जिनके जीवन के हर पहलू में एक अलग ही झलक दिखाई देती है। जहां उनका बचपन लीलाओं से भरा है तो वहीं उनकी जवानी रास लीलाओं की कहानी से परिपूर्ण है। एक सखा और राजा के रूप में श्रीकृष्ण सभी दुखी लोगों के दुखहर्ता बनते हैं, तो युद्ध में कुशल नीतिज्ञ की भूमिका निभाते हुए नजर आते हैं। श्रीकृष्ण ने महाभारत में जो गीता उपदेश दिया था। वह आज भी लोगों को कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाता है। आज के दौर में भी उनके उस समय के गीता उपदेशों का बहुत महत्व है।

यहां पर यह कहना गलत ना होगा कि भगवान श्री कृष्ण के जन्म से लेकर उनकी मृत्यु तक उनका जीवन हमें सदैव कुछ ना कुछ सिखाता ही रहा है। तभी तो दुनिया भर में उनके करोड़ों भक्त हैं। जो उनके जन्मदिवस को बड़ी धूमधाम से बनाते हैं। श्री कृष्ण के जन्म दिवस को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले लोग और उनके भक्त गण व्रत रखते हैं और श्री कृष्ण की सच्चे मन से पूजा करते हैं।

श्रीकृष्ण का जन्म

जन्माष्टमी यानी श्री कृष्ण का जन्मदिन भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि के दिन आता है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने इस धरती पर जन्म लिया था। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में हुआ था। उन्होंने रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया था, इसीलिए यदि कभी अष्टमी तिथि के दिन रोहिणी नक्षत्र पड़ता है तो इसे बहुत ही शुभ और विशेष संयोग माना जाता है। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बुधवार 12 अगस्त 2020 मनाया जाएगा।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव जन्मोत्सव जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। कई जगहों पर इस दिन दही हांडी उत्सव का आयोजन होता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा अर्चना होती है। शास्त्रों के मुताबिक अत्याचारी कंस का वध करने के लिए धरती पर भगवान श्री हरि विष्णु ने कृष्ण रूप में अवतार लिया था। उन्होंने देवकी और वासुदेव के यहां श्री कृष्ण अवतार में जन्म लिया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना के साथ ही भजन कीर्तन गाए जाते हैं। कहते हैं कि जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने से भगवान श्री कृष्ण आपके जीवन की सभी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं।

इसके अलावा मान्यता है कि जिन दंपतियों की अभी तक कोई संतान नहीं है यदि वह सच्चे मन से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण का व्रत रखते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं, तो श्री कृष्ण उनकी संतान प्राप्ति की इच्छा जल्द ही पूरी करते हैं। इसके साथ ही इस दिन व्रत रखने से संतान संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती है और संतान की आयु भी लंबी होती है। कहते हैं कि निसंतान दंपतियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात्रि को कृष्ण जन्म के समय छोटे बच्चों को बांसुरी अर्पित करनी चाहिए, ऐसा करने से भी आपकी संतान संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

जन्माष्टमी की कथा

हिंदू शास्त्रों के अनुसार द्वापर युग में राजा उग्रसेन का पुत्र कंस था। जो बहुत ही अत्याचारी और क्रूर था। कंस ने अपने पिता को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया और अपनी बहन देवकी का विवाह यादव खुल के वासुदेव से कराया। हालांकि इतना क्रूर होने के बावजूद भी कंस अपनी बहन से बहुत प्यार करता था। जब वह अपनी बहन देवकी को विवाह के बाद विदा कर रहा था। तभी अचानक आकाश में एक भविष्यवाणी हुई कि देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान ही कंस वध करेगी।

ये भविष्यवाणी सुनकर कंस डर गया और उसने अपनी प्यारी बहन देवकी और वासुदेव को कारागृह में बंदी बना लिया। कंस भविष्यवाणी से इतना भयभीत हो गया कि वह अपनी प्यारी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव की हत्या करना चाहता था, लेकिन वासुदेव ने कंस को समझाया कि हमारी जब भी कोई संतान होगी तो हम उसे तुम्हें दे देंगे, तुम चाहे तो उसका वध कर देना। कंस वासुदेव की इस बात पर सहमत हो गया। फिर जब देवकी और वासुदेव को कोई भी संतान होती , वह उसे छीनकर उस संतान की हत्या कर देता था। अभी तक वह देवकी के छह पुत्रों को मार चुका था। जिनके बाद देवकी ने एक कन्या को जन्म दिया।

जिसकी खबर कंस तक पहुंची और जब कंस उस कन्या की हत्या करने के लिए उसको अपने हाथों में उठाता है, तो वह कन्या आकाश में उड़ जाती है और एक देवी का रूप लेकर कंस से कहती है “हे अत्याचारी कंस तुझे मारने वाला तो जन्म ले चुका है और वह सुरक्षित गोकुल भी पहुंच गया है”। जिसे सुनकर कंस और भी डर जाता है। उसके बाद कंस ने भगवान श्री कृष्ण को मारने के कई प्रयास किए। जिसमें वह असफल रहा और अंत में भगवान श्री कृष्ण द्वारा उसका वध किया गया। इस तरह अधर्म पर धर्म की जीत हुई।

शुभ मुहूर्त

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन निशिता का समय 12 अगस्त 2020 रात को 12:05 से शुरू होकर 12 अगस्त 2020 की रात 12:48 तक रहेगा। जन्माष्टमी व्रत पारण समय 12 अगस्त 2020 को रात 12:48 पर होगा।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा विधि

अब हम आपको श्री कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा विधि के बारे में बताते हैं।

1- जन्माष्टमी का व्रत अष्टमी तिथि से शुरू होता है और इस व्रत का पारण नवमी तिथि के दिन होता है।

2- इस व्रत को करने के लिए, सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और नए या साफ वस्त्र पहनने चाहिए।

3- उसके बाद अपने हाथों में जल कोई भी एक फल और फूल लेकर श्री कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

4- फिर देवकी जी का प्रसूति ग्रह बनाना चाहिए। जिसमें माता देवकी और श्री कृष्ण की मूर्ति या फोटो रखनी करनी चाहिए।

5- इसके बाद वासुदेव, देवकी, नंद यशोदा, बलदेव और माता लक्ष्मी का नाम लेते हुए विधि विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए।

6- फिर पूरे दिन व्रत रखकर रात को 12:00 बजे भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर उनके बाल रूप को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए, उसके बाद स्वच्छ गंगा जल से स्थान कराना चाहिए।

7- फिर श्री कृष्ण के उस बालवतार को नए वस्त्र पहना कर उसका श्रृंगार करना चाहिए।

8- उसके बाद श्री कृष्ण के बाल अवतार को झूले में बिठाकर झूला झूलाना चाहिए।

9- धूप-दीप से उनकी आरती उतारनी चाहिए।

10- फिर माखन मिश्री का भोग लगाते हुए प्रार्थना करनी चाहिए कि, “हे, श्री कृष्ण मुरारी हमारी इस पूजा और भोग को ग्रहण कीजिए”।

11- भोग लगाने के बाद बाल रूप को गंगाजल भी अर्पित करना चाहिए।

12- यह सारी विधि करने के बाद आप अपनी व्रत का पारण कर सकते हैं

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