श्री राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को ही क्यों है ज़रूरी?

ram mandir

अयोध्या में प्रभु श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए कई लड़ाइयां लड़ी गई हैं। कई सालों से इस मंदिर के लिए पूरे देश भर में बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था और अब यह इंतजार खत्म हो गया है, क्योंकि प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण 5 अगस्त 2020 को होगा।

वैसे तो प्रभु राम की जन्मभूमि अयोध्या में भूमि पूजन का अनुष्ठान 3 अगस्त 2020 रक्षाबंधन के दिन से ही शुरू हो जाएगा, लेकिन मंदिर के लिए भूमि पूजन 5 अगस्त 2020 को होगा। इसी दिन हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा श्री राम मंदिर का भूमि पूजन और शिलान्यास किया जाएगा। रामलला के मंदिर के इस मंदिर को बनने में 3 साल का समय बताया जा रहा है। इस मंदिर का निर्माण बहुत ही भव्य होने वाला है। इसकी ऊंचाई 161 फिट ऊंची होगी और इस मंदिर में पांच गुंबद बनाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि इतना भव्य मंदिर अभी तक देश में कहीं भी नहीं है।

5 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकंड से लेकर 12:15 47 सेकंड तक का समय भूमि पूजन के लिए बहुत ही शुभ मुहूर्त माना जा रहा है। इसके पीछे की वजह इस दिन अभिजीत मुहूर्त और धनिष्ठा नक्षत्र हैं, जो सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहे हैं। यह सबसे शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है। आज की इस वीडियो में हम आपको यह बताएंगे कि आखिर 5 अगस्त को ही राम श्री राम मंदिर के भूमि पूजन को क्यों चुना गया। इसके साथ ही यह जानने के लिए कि 5 अगस्त को प्रभु राम किस रंग की पोशाक पहनेंगे? क्या होगी पूजा विधि?

अभिजीत मुहूर्त और भाद्रपद

सबसे पहले बात करते हैं अभिजीत मुहूर्त और भाद्रपद की। वैदिक ज्योतिष की मानें, तो 5 अगस्त को भाद्रपद महीने की शुरुआत हो रही है। सूर्य, सिंह राशि में गोचर करने वाले हैं। 5 अगस्त के दिन दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त है। शास्त्रों के अनुसार अभिजीत मुहूर्त में किया गया कोई भी कार्य शुभ फलदाई होता है। इसके अलावा इस मुहूर्त में ही भगवान श्री राम का भी जन्म हुआ था। इसके साथ ही हिंदू पंचांग के मुताबिक अभिजीत मुहूर्त को सबसे सर्वोत्तम और शुभ फलदाई बताया गया है।

हर रोज दोपहर से करीब 24 मिनट पहले अभिजीत मुहूर्त शुरू होता है और मध्याह्न के 24 मिनट बाद ही खत्म हो जाता है। आप इस मुहूर्त के बारे में इस तरह समझ सकते हैं, जैसे कि अगर सुबह 6:00 बजे सूरज निकलता है, तो अभिजीत मुहूर्त 12:00 बजे शुरू होगा और 12 बजकर 24 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। हिंदू समय के अनुसार दिन में लगभग 30 मुहूर्त होते हैं। जिसमें से 15 सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच होते हैं और 15 सूर्यास्त से सूर्य उदय के बीच माने जाते हैं। जिसमें से अभिजीत मुहूर्त को सबसे कल्याणकारी और अति शुभ फलदाई माना जाता है।

धनिष्ठा नक्षत्र और शतभिषा नक्षत्र

प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का कार्यक्रम धनिष्ठा नक्षत्र पर ही शुरू होगा। आकाश में यह नक्षत्र 23वां है और इसके स्वामी मंगल हैं । इस नक्षत्र के देवता वास्तु है। आपको बता दें कि इस नक्षत्र का संबंध भगवान श्री कृष्ण और भोलेनाथ से भी है। श्री राम के मंदिर के भूमि पूजन का कार्यक्रम का अंत शतभिषा नक्षत्र में होगा, जो 27 नक्षत्रों में 24वें स्थान पर आता है। इस नक्षत्र के स्वामी राहु और देवता वरुण है। शतभिषा का अर्थ 100 चिकित्सक से है। इसीलिए कहते हैं कि यह नक्षत्र हमारी 100 अभिलाषाओं को पूरा करता है। शतभिषा नक्षत्र में मुहूर्त की समाप्ति का संकेत, यह है कि मंदिर के निर्माण का काम शुभता को दर्शाएगा और सफलतापूर्वक संपन्न होगा । इसीलिए श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए इन मुहूर्तो का चयन किया गया है।

श्री राम मंदिर के भूमि पूजन की विधि

5 अगस्त 2020 को प्रभु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में उनके भव्य मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन होगा। जिसमें सबसे पहले कलश की स्थापना की जाएगी। यह कलश स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगी। इसके बाद गंगाजल के साथ। सभी तीर्थ स्थलों का जल, औषधी, पंचरत्न और मिट्टी रखी जाएगी । फिर जमीन में करीब साढे 3 फीट का गड्ढा खोदकर पाताल लोक के देवता शेषनाग को प्रसन्न करने के लिए चांदी के नाग नागिन और चांदी के कछुए को भी स्थापित किया जाएगा।

इसके बाद मंगल कलश को सेवर घास पर रखकर सभी तीर्थों के गंगा जल से भरा जाएगा कलश स्थापित होने के बाद वैदिक वास्तु के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी जी 32 सेकंड में भद्रा जया रिक्त आनंदा और पुणे के रूप में 5 शिलाओं का पूजन करेंगे और उन्हें और इन्हीं मंदिर की नींव के रूप में स्थापित करेंगे। आपको बता दें कि यह सभी शिलाएं चांदी की होंगी, जिन्हें ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास ने तैयार करवाया है।

कैसी पोशाक पहनेंगे प्रभु श्री राम ?

बताया जा रहा है कि 5 अगस्त को होने वाले श्री राम मंदिर के भूमि पूजन के दौरान भगवान श्री राम उनके भाई लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न सभी रत्नजड़ित पोशाके पहनेंगे। रामदेव सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम मूर्तियों को यह रत्न जड़ित पोशाके पहनाएंगे। कहा जा रहा है कि इन पोशाकों में नवरत्न लगाए गए हैं। इन पोशाकों का रंग हरा होगा। भूमि पूजन बुधवार को होना है और इस दिन के लिए हरा रंग बहुत ही शुभ माना जाता है। इसीलिए प्रभु श्री राम की मूर्तियों को इस दिन हरे रंग की नवरत्न जड़ित पोशाक पहनाई जाएंगी।

कैसा होगा भव्य श्री राम मंदिर ?

प्रभु श्री राम के मंदिर के मूल मॉडल में वास्तु के अनुसार ज्यादा परिवर्तन नहीं किए गए हैं। बस मंदिर के शिखर की ऊंचाई को बढ़ाकर 161 फुट कर दिया गया है और मंदिर के स्तंभों की संख्या 2 से बढ़ाकर 5 कर दी है। जिसके नीचे नृत्य मंडप, सिंह द्वार और रंग मंडप बनेंगे। इसके अलावा मंदिर के क्षेत्रफल में भी थोड़ी सी वृद्धि हुई है। आपको बता दें कि इस मंदिर में सिर्फ वही पत्थर लगेंगे जिन्हें राम मंदिर की कार्यशाला में तराशा गया है।

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