रुद्राभिषेक करने का क्या है सही तरीका और समय?

रुद्राभिषेक, महादेव को प्रसन्न करने में रामबाण है। यदि सही समय पर रुद्राभिषेक किया जाए, तो आप भी महादेव से मनचाहा वरदान प्राप्त कर सकते हैं। शास्त्रों की मानें तो महादेव के रुद्र रूप को अभिषेक बहुत ही प्रिय है। इसीलिए भक्तगण महादेव के जल्दी प्रसन्न करने के लिए उनका रुद्राभिषेक जरूर करते हैं। इतना नहीं सावन शिवरात्रि में तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

सभी देवों में महादेव ही हैं जो अपने भक्‍तों की पूजा से बहुत जल्‍दी ही प्रसन्‍न हो जाते हैं। यदि आप अपनी कुछ विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति करना चाहते हैं तो आपके लिए महादेव का रुद्राभिषेक करना सबसे शुभ उपाय हो सकता है। आज की इस वीडियो में हम आपको रुद्राभिषेक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में बताएंगे। इसीलिए इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें।

रुद्राभिषेक की महिमा

सबसे पहले बात करते हैं कि आखिर रुद्राभिषेक इतना प्रभावशाली क्यों है? वैसे तो भोलेनाथ कैसी भी पूजा पाठ करने से प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन रुद्राभिषेक उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है। कहते हैं कि आप रुद्राभिषेक से महादेव को प्रसन्न करके असंभव को भी संभव करने की शक्ति पा लेते हैं। इसीलिए आप भी सही समय पर रुद्राभिषेक कीजिए और महादेव की अपार कृपा पाइए। कहते हैं रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं। भोलेनाथ की कृपा से सारे ग्रहों की बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश हो जाता है। शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित करना ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ किया जाता है। सावन के महीने में रुद्राभिषेक करना ज्यादा अति शुभकारी होता है। तभी तो कहते हैं कि रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।

rudrabhishek of lord shiva

रुद्राभिषेक के फायदे

1. शत्रुओं की बुरी दृष्टि समाप्त हो जाती है।
2. घर और संपत्ति की प्राप्ति होती है।
3. समाज में मान- सम्मान की प्राप्ति होती है।
4. घर में सदैव लक्ष्मी का वास बना रहता है।
5. दुखों का अंत होता है।

कब और कैसे करें?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अलग–अलग शिवलिंग और अलग-अलग जगहों पर रुद्राभिषेक करने का फल भी अलग-अलग ही मिलता है। तो चलिए जानते हैं कि कौन से शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना ज्यादा फलदायी माना जाता है।

1. किसी भी शिव मंदिर के शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना बहुत उत्तम होता है।
2. इसके अलावा आप घर में स्थापित शिवलिंग पर भी अभिषेक कर सकते हैं।
3. शिवलिंग न हो तो अपने अंगूठे को भी शिवलिंग मानकर उसका अभिषेक किया जा सकता है।
4. रुद्राभिषेक घर से ज्यादा मंदिर, नदी के तट पर और सबसे ज्यादा पर्वतों पर फलदायी माना जाता है।

विभिन्न वस्तुओं से अभिषेक करने का फल

1. मनोकामना के अनुसार रुद्राभिषेक में अलग-अलग वस्तुओं का उपयोग होता है। ज्योतिषों का कहना हैं कि जिस वस्तु से रुद्राभिषेक करते हैं उससे जुड़ी मनोकामना ही पूरी होती है, तो आइए जानते हैं कि रुद्राभिषेक करने की कौन सी वस्तु से आपकी कौन सी मनोकामना पूरी होगी?
1. शिवलिंग पर घी की धारा से अभिषेक करने से वंश बढ़ता है।
2. यदि आप इक्षुरस से अभिषेक करेंगें तो आपके दुर्योग नष्ट होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
3. शिवलिंग पर भस्म से अभिषेक करने से मनुष्य को मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
4. शक्कर मिले जल से अभिषेक करने से संतान प्राप्ति होती हैं।
5. शहद से अभिषेक करने से पुरानी बीमारियां नष्ट होती हैं।
6. भोलेनाथ पर शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से इंसान विद्वान हो जाता है।
7. गाय के दूध से अभिषेक करने से आरोग्य का वरदान मिलता है।

शुभ – मुहूर्त

जैसा कि सभी जानते हैं कि किसी भी धार्मिक काम को करने में समय और मुहूर्त का एक खास महत्व होता है। देवों के देव महादेव ब्रह्माण्ड में घूमते रहते हैं। महादेव कभी मां गौरी के साथ होते हैं तो कभी कैलाश पर विराजते हैं। ज्योतिषाचार्याओं की मानें तो रुद्राभिषेक तभी करना चाहिए, जब शिव जी का निवास मंगलकारी हो। इसी तरह रुद्राभिषेक के लिए भी कुछ उत्तम योग बनते हैं। कभी भी शिव जी का निवास देखे बिना रुद्राभिषेक न करें, नहीं तो इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। अब बात करते हैं कि रुद्राभिषेक के लिए किन तिथियों में महादेव का निवास मंगलकारी होता है –

1. जब हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी को महादेव मां गौरी के साथ रहते हैं।
2. जब हर महीने कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या को भी शिव जी और मां गौरी के साथ रहते हैं।
3. जब कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को भोलेनाथ कैलाश पर्वत पर वास करते हैं।
4. जब शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को भी महादेव कैलाश पर ही रहते हैं।
5. कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी को महादेव नंदी पर सवार होकर पूरा विश्व भ्रमण करते हैं।
6. इसके साथ ही जब भोलेनाथ शुक्ल पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी तिथि को भी विश्व का भ्रमण कर रहे होते हैं।

अनिष्‍टकारी तिथियाँ

इसके साथ ही शिव जी का निवास कुछ तिथियों को अनिष्टकारी होता है। इसीलिए इन तिथियों को अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। तभी तो ये करने से पहले शिव के अनिष्‍टकारी निवास का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। तो चलिए जानते हैं कि अनिष्टकारी तिथियां कौन सी हैं, जब मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक नहीं किया जा सकता है…

1- जब भगवान शिव कृष्णपक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी को श्मशान में समाधि में लीन रहते हैं।
2- शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और पूर्णिमा को भी शिव जी श्मशान में समाधि लगाते हैं।
3- जब महादेव कृष्ण पक्ष की द्वितीया और नवमी को देवताओं की समस्याएं सुनते हैं।
4- जब भोलेनाथ शुक्लपक्ष की तृतीया और दशमी में भी देवताओं की समस्याएं सुन रह होते हैं।
5- जब महादेव कृष्णपक्ष की तृतीया और दशमी को नटराज क्रीड़ा में व्यस्त रहते हैं।
6- शुक्लपक्ष की चतुर्थी और एकादशी को भी नटराज क्रीड़ा में व्यस्त रहते हैं।
7- कृष्णपक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी को रुद्र भोजन करते हैं।
8- शुक्लपक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी को भी रुद्र भोजन करते हैं।

कब अति शुभ होता है?

कुछ व्रत और त्योहार अभिषेक के लिए हमेशा शुभ ही होते हैं। उन दिनों में तिथियों का ध्यान रखने की जरूरत नहीं होती है। जैसे कि –
1. शिवरात्री, प्रदोष और सावन के सोमवार को शिव के निवास पर विचार नहीं करते।
2. सिद्ध पीठ या ज्योतिर्लिंग के क्षेत्र में भी शिव के निवास पर विचार नहीं करना चाहिए।

ये स्थान और समय दोनों ही रुद्राभिषेक के लिए हमेशा मंगलकारी ही होते हैं। यदि आप भी महादेव से मनचाहा वरदान चाहते हैं तो इस सावन शिवरात्रि आप भी भोलेनाथ का अभिषेक अवश्य करें।

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