राहू – केतु से बचने के लिए ऐसे करें महादेव का पूजन

rahu ketu

शनिदेव को न्याय का देवता, मारक, अशुभ और दुख कारक माना जाता है। कहते हैं शनि की कुदृष्टि जिस पर पड़ गई, उस व्यक्ति का जीवन नर्क से भी बदत्तर बन जाता है। इसीलिए सभी लोग शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए हमेशा उन्हें प्रसन्न करने की जद्दोजहद करते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शनिदेव की तरह दो ग्रह और भी हैं। जो किसी व्यक्ति या उसके परिवार पर अपनी कुदृष्टि डालते हैं, तो उसका और उसके परिवार के जीवन में संकट आ जाता है। ये ग्रह हैं राहू – केतु

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 

जब राहू – केतु किसी पर क्रोधित हो जाते हैं, तो व्यक्ति को जीवन में कदम-कदम पर दुख झेलने पड़ते हैं। इतना ही नहीं उसे मृत्यु तुल्य कष्टों को सामना करना पड़ता। लेकिन जिन व्यक्तियों से राहू – केतु प्रसन्न हो जाते हैं, उनको सारे सुख बहुत ही सरलता से मिल जाते हैं। राहु-ग्रह भोलेनाथ के परम भक्त हैं। आपके लिए ये एक सुनहरा मौका है, जब आप भोले नाथ के साथ-साथ राहु-केतु को भी प्रसन्न कर सकते हैं।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सारे ग्रह राहु-केतु के मध्य में आ जाते हैं, तो कालसर्प योग बनता है। लेकिन जो लोग अपने माता-पिता की सेवा करते हैं, कालसर्प योग उनको कष्ट नहीं पहुंचा सकता है। जिनकी कुंडली में कालसर्प योग होता है , उन्हें कालसर्प दोष की शांति जरूर करवानी चाहिए। जैसे कि हमने अभी बताया राहु-ग्रह महादेव के परम भक्त हैं, इसलिए भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।

शिव आराधना से मनोकामनाएं पूर्ति 

सावन के पूरे महीने और विशेषकर सोमवार के दिन शिव मंदिरों में भीड़ रहती है, लेकिन इस साल कोरोना के संकटकाल की वजह से ज्यादातर मंदिर बंद हैं। जिससे वहाँ बहुत कम ही लोग महादेव के पूजन के लिए जाते हैं। कोरोना के चलते अधिकतर लोग अपने घरों में ही रहकर भोलेनाथ की पूजा-आराधना कर रहे हैं।

जैसा कि सभी जानते हैं, कि सावन के महीने भोलेनाथ की पूजा करने से सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वैसे भी भोलेनाथ तो जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। इनकी पूजा बहुत ही आसान होती है। अगर आप भोलेनाथ को एक लोटा जल और एक पत्ती भी अर्पित करेंगे तो वो आपसे इतने में ही प्रसन्न होकर आपको मनवांछित वरदान दे देंगे। भोलेनाथ प्रसन्न यानी सब प्रसन्न। फिर चाहे वो राहू – केतु ही क्यों न हो।

सोमवार का व्रत

सावन में सोमवार के व्रत आ बहुत महत्व है इसीलिए इस दिन व्रत जरूर रखना चाहिए। भोलेनाथ की सच्चे मन और श्रद्धा से आराधना करनी चाहिए। शाम को सूर्यास्त के बाद महादेव के सामने दीपक प्रज्वलित करना चाहिए और शिव जी को सफेद भोज्यपदार्थों जैसे खीर, मावे की मिठाई और दूध से बने पदार्थों का प्रसाद चढ़ना चाहिए।

राहू – केतु के दुष्प्रभाव से ऐसे बचें

कहते हैं कि शिवलिंग का अभिषेक करने का फल उसी पल मिल जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभिषेक में सृष्टि की सारी मनोकामनायें पूर्ण करने की शक्ति होती है । इसीलिए अपनी आवश्यकता अनुसार अलग-अलग पदार्थों से शिवलिंग का अभिषेक करके आप इच्छित फल पा सकते हैं।ऐसे में अगर आप पर राहु की महादशा चल रही हो। सूर्य, चंद्र और मंगल का अंतर आपको कष्ट दे रहा हो, तो आपको रोज शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ा कर, दुग्धाभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होंगे और फिर राहू – केतु का दुष्प्रभाव भी आप का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

शिव मंत्रों का जाप

सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते या दुग्धाभिषेक करते समय इन शिव मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से आपके द्वारा चढ़ाए गई किसी को वस्तु को भोलेनाथ जल्द ही स्वीकार कर लेंगे। तो चलिए जानते हैं इन मंत्रों के बारे में –

• ॐ नमः शिवाय॥

• ॐ ह्रीं ह्रौं नम: शिवाय॥

• ॐ पार्वतीपतये नम:॥

• ॐ पशुपतये नम:॥

• ॐ नम: शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नम: ॐ ॥

शिवपुराण का पाठ

जब राहु की महादशा या अंतर प्रत्यंतर काफी कष्टकारी चल रही हो, तो ऐसे में शिवपुराण का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। कहते हैं कि राहु की दशा में लगातार महादेव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहना चाहिए। इससे राहु के कष्टों से जल्दी छुटकारा मिलता है।

पूजा का ढोंग ना करें

अगर आपके जन्मांक की स्थित में राहु ग्रह, चंद्र और सूर्य को दूषित कर रहा हो, तो आपको भोलेनाथ की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। महादेव अपने भक्त की सच्ची श्रद्धा से बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं, इसीलिए भक्तिभाव और सच्ची श्रद्धा से महादेव की आराधना करें। पूजा का ढोंग या दिखावा न करें। इससे ना ही भोलेनाथ और न ही आपको कोई फर्क पड़ेगा। दिखावे की भक्ति कभी भी फलदायी नहीं होती ।

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