पर्यावरण दिवस पर पढ़ें युवा लेखक शिवांशु सिंह का लेख

आज 5 जून है यानी विश्व पर्यावरण दिवस और जून के इस महीने  का मौसम हमें याद दिला रहा है कि हम अपने पर्यावरण की उतनी इज्जत नहीं कर रहे हैं, जितनी की जानी चाहिए।
पर्यावरण दिवस के मौके पर पूरी दुनिया में पर्यावरण से जुड़ी हुई बातें कही और सुनी जा रही हैं। अच्छी बात यह है कि छोटे से छोटे और बड़े से बड़े लोगों के फेसबुक और ट्विटर भी हरे भरे दिख रहे है। प्लास्टिक से बचने की सलाह दी जा रही है। पौधे लगाने के लिए कहा जा रहा है और ना जाने कितनी बातें की जा रही हैं। अगर यही जज्बा हम रोज दिखाएं तो शायद हम दुनिया को और बेहतर बना सकेंगे।
पिछले कुछ वर्षों में हमने जिस तरह से अपने जीवन को स्वार्थी बनाया है और और जिस दर से पर्यावरण का ह्रास किया है, शायद हमें और हमारी अगली पीढ़ियों को अच्छी मौत भी नसीब ना हो। हर बूंद पानी बर्बाद करने से पहले हमें यह सोचना  शुरू कर देना चाहिए कि दुनिया में एक कोना ऐसा भी है, जहां लोग बिना पानी के मर रहे हैं। बिजली बर्बाद करने से पहले यह सोच लेना होगा किसी भारत में एक गांव ऐसा है, जहां बच्चे चाहकर भी नहीं पढ़ पा रहे हैं क्योंकि वहां बिजली नहीं पहुंच रही है। पिछले कुछ सालों में हमने दिल्ली की जो हालत की है, उसके लिए हमें हमारी आगे की पीढ़ी माफ नहीं कर  पाएंगी। इस  पर्यावरण दिवस पर हमें यह सोच लेना चाहिए कि हम प्रकृति की उतनी ही इज्जत करेंगे जितने एहसान प्रकृति ने हम पर किए हैं। हम ही नहीं बल्कि हम अपनी अगली पीढ़ियों को भी यही सिखाएं और समझाएं कि प्रकृति हमारी मां जैसी है। बिना किसी स्वार्थ के हमें यह वे सब चीजें देती है, जिनसे हम जिंदा रह सकें।
बाकी आप सभी को पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं! उम्मीद है हमारी आने वाली पीढ़ियां भी उसी आराम के साथ जी  सकेंगी  जिस आराम के साथ हम जी रहे हैं।
:-  शिवांशु सिंह ( युवा कवि एवं लेखक )

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