भारतीय नौसेना दिवस: 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना की जीत का इतिहास

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national indian navy day 2020|नौसेना दिवस हर साल 4 दिसंबर को नौसेना के जवानों को याद कर मनाया जाता है। इस दिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना की जीत हुई थी। भारतीय नौसेना की ओर से समुद्र में तैराकी प्रतियोगिता सहित अन्य कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

भारतीय नौसेना दिवस का इतिहास

बता दे कि भारतीय नौसेना दिवस का इतिहास काफी दिलचस्प है। जंग ए आजादी से लेकर कई मामलों में भारतीय नौसेना ने अपनी क़ामयाबी हासिल की है।

भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग नौसेना है। इस सामुद्रिक अंग की स्थापना 1612 में हुई। जहाजों की सुरक्षा के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने ईस्ट इंडिया कंपनी मैरिन के रूप में एक सेना गठित की, लेकिन वक़्त के साथ साथ इसकी प्रशासनिक व्यवस्था बदलती चली गई और भारत के रंग में रंगती चली गई।

कुछ समय बाद अंग्रेजो ने इसका नाम बदलकर रॉयल नौसेना के नाम से रख दिया। ज़ब भारत को आजादी मिली तो नौसेना का 1950 का दौबारा गठन किया गया। इसका नाम भारतीय नौसेना के रूप में रखा गया। अगर अभी की बात की जाए तो भारतीय नौसेना पूरे विश्व की पाँचवी नौसेना है। पाकिस्तान ने 3 दिसंबर 1971 को भारतीय हवाई छेत्र में हमला किया था। जिसके बाद भारत ने एक ऑपरेशन चलाया जिसका नाम रखा गया ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’।

भारत ने भारतीय नौसेना ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर भारी बमबारी कर उसे बुरी तरह तबाह कर दिया था। 4 दिसंबर 1971 की रात में जल सीमा में घुसकर भारतीय नौसेना के जाबाजों ने कराची नौसेना पर भारी हमले किए। 4 दिसंबर 1971 को मिली जीत की वजह से ही हर साल 4 दिसंबर नौसेना दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।

भारतीय नौसेना दिवस की सबसे बड़ी खासियत

हमले के दौरान भारतीय नौसेना के जाबाजों ने पाकिस्तान के 4 जंगी जहाजों पर 6 मिसाइल छोड़कर उन्हें समुंद्र में डुबो दिया था। इंडियन नेवी के हमले के दौरान करीब 500 से ज्यादी पाकिस्तानी नौसेना के मारे गए थे। इस युद्ध के दौरान पहली बार भारत ने शिप मिसाइल से हमला किया था। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे ख़ास बात यह थी कि इसमें भारतीय नौसेना को थोड़ा सा भी नुक्सान नहीं पहुंचा था।

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