“राइट टू हेल्थ कॉन्क्लेव” : मध्यप्रदेश बनेगा ‘राइट टू हेल्थ’ कानून लागू करने वाला पहला राज्य

मध्यप्रदेश बनेगा 'राइट टू हेल्थ' कानून लागू करने वाला पहला राज्य

थाईलैंड के यूनिवर्सल हेल्थ केयर मॉडल की तर्ज़ पर सभी वर्गों के लिए कैशलेस स्वास्थ सुविधाएं उपलब्ध कराने की इस योजना की घोषणा मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल के मिन्टो हॉल में दो-दिवसीय ‘राइट टू हेल्थ कॉन्क्लेव” के दौरान की। यदि मध्यप्रदेश इस योजना को लागू करने में सफल होता है तो वह देश का पहला ‘राइट टू हेल्थ कानून’ लागू करने वाला राज्य होगा।

एक तरफ जहां पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माना था कि उनकी सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कुछ नहीं कर सकी वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरे प्रयासों के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार व उत्तम सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अग्रसर हैं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शक्ति योजना 2025, टीबी मुक्त मध्यप्रदेश और उपशामक सेवाओं के लिए प्रकाशित मार्गदर्शिका का विमोचन किया।

थाईलैंड के यूनिवर्सल हेल्थ केयर मॉडल के अनुसार नागरिकों को कैशलेस सुविधाओं के साथ-साथ क्वालिटी उपचार भी दिया जाता है अर्थात सभी वर्गों का एक समान इलाज किया जाएगा चाहे वह गरीब हो या अमीर हो ।

स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले और यह उनके अधिकार में जुड़े हमारा प्रयास है कि इस मॉडल के अंतर्गत हम लगभग 97% बीमारियों को कवर करें। जिससे लोगों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

नीति आयोग के सलाहकार डॉ वी के पॉल के मुताबिक मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्वास्थ्य का अधिकार देने के लिए जो कदम उठाया है वह केवल सराहनीय और साहसिक निर्णय नहीं है बल्कि इसके पश्चात मध्यप्रदेश स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश का नेतृत्व भी करेगा।

इस अवसर पर स्वास्थ्य के अधिकार को क्रियान्वित करने में जन-सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय सरकारी निकायों की भूमिका पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई।

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