कामिका एकादशी व्रत का महत्व, पूजा-विधि और व्रत-कथा | 16 जुलाई 2020

वैसे तो पूरे वर्ष में 24 एकादशी व्रत आते हैं। जिस वर्ष में अधिक मास होते हैं, उसमें 26 एकादशी आती हैं। एकादशी करने का व्रत करने से महान फल प्राप्त होते हैं। प्रत्येक पक्ष में एक एकादशी आती है और दोनों महीनों को मिलाकर के दो एकादशी होती हैं। इस तरह पूरे साल 24 एकादशी होती हैं। इस साल 26 एकादशी होंगी। सावन महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहते हैं।

16 जुलाई को है कामिका एकादशी

इस बार कामिका एकादशी का पर्व 16 जुलाई 2020 को गुरुवार को पड़ रहा है इसीलिए यदि आप ये व्रत रखना चाहते हैं, तो 16 जुलाई को इसका व्रत रखें और अगर आप व्रत प्रारंभ करना चाहते हैं तो यह एक सर्वोत्तम एकादशी है। 16 जुलाई की एकादशी से आप के व्रत का की शुरुआत कर सकते हैं क्योंकि सावन महीने में होने वाली एकादशी सर्वोत्तम एकादशी मानी जाती है। आज हम आपको सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के व्रत के नियम, महत्व, पूजा की विधि और कथा के बारे में बताएंगे।

15 जुलाई से करें तैयारी

यदि आप 16 जुलाई को एकादशी का व्रत रखते हैं तो आपको दशमी तिथि के दिन से ही नियम का पालन शुरू कर देने होंगे। यानी कि 16 जुलाई एकादशी का व्रत रखना है तो आपको 15 जुलाई से ही सारे नियम नियमों का पालन करना शुरू कर देना होगा। 15 जुलाई के दिन आपको एक समय ही भोजन करना है, यानी दशमी के दिन आपको पूरे दिन में केवल एक समय ही भोजन करना चाहिए। उस भोजन में लहसुन, प्याज या चावल नहीं खाना है। यानी कि आपको शुद्ध और सात्विक भोजन करना है। मांस-मदिरा का त्याग करना होगा। 15 जुलाई के दिन से ही लहसुन और प्याज का परित्याग कर दें और 16 जुलाई को सुबह जल्दी उठकर हो सके तो सूर्योदय से पहले ही उठे स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें और भगवान की पूजा अर्चना करें सूर्य भगवान को जल चढ़ाएं। उसके बाद लक्ष्मी नारायण सामने, कृष्ण या भगवान राम जी के सामने बैठकर व्रत का संकल्प करें और हाथ में जल और तुलसी पत्र लेकर आपको इस व्रत का संकल्प करना चाहिए।

व्रत का संकल्प कैसे करें?

संकल्प करने के लिए तुलसी पत्र बहुत ही अनिवार्य होता है इसीलिए तुलसी पत्र पहले से ही आप तोड़ के रख लें। यदि आप चाहें तो एकादशी के व्रत से पहले ही तुलसी पत्र को तोड़कर साफ पानी से धोकर रख लें। यानी कि 1 दिन पहले ही दशमी तिथि यह दिल 15 जुलाई को तुलसी पत्र तोड़ कर रखना होगा क्योंकि तुलसी पत्र के बिना एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है, इसीलिए 16 जुलाई के दिन तुलसी पत्र और जल लेकर संकल्प करें कि हे प्रभु मेरा नाम जो भी आपका नाम है, आप अपना नाम ले, अब और मेरा गोत्र जो भी आप का गोत्र का नाम ले औऱ कहें कि प्रभु मैं श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी व्रत करने का संकल्प आपके सामने धारण करता हूं और मेरे जीवन की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएं। इसके अलावा मेरे परिवार में सुख शांति, समृद्धि बनी रहे। यदि आपके मन में कोई कामना कोई प्रार्थना है, तो भगवान के सम्मुख उसको रखें।

व्रत का मंत्र

एकादशी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली एकादशी मानी जाती है और इस संकल्प को भगवान लक्ष्मी नारायण या कृष्णा-राम जी के सामने अर्पण कर दें। इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश मंत्र का जाप करना चाहिए। राम, कृष्ण, नारायण आदि विष्णु के सहस्रनाम का जप करें और एकादशी व्रत की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए।

एकादशी व्रत के नियम

एकादशी व्रत के कुछ नियम हैं, जिनका आपको पालन करना चाहिए –

1. एकादशी व्रत में सबसे पहले यह बात ध्यान रखें कि एकादशी के दिन चावल का उपयोग घर में बिल्कुल भी ना करे।

2. इस दिन चावल बनाना या खाना बिल्कुल भी वर्जित है। इसके अलावा चावल से बनी किसी भी वस्तु का प्रयोग ना करें।

3. इस दिन शेविंग नहीं करनी चाहिए। बाल या नाखून नहीं काटने चाहिए।

4. क्रोध नहीं करना चाहिए। लड़ाई झगड़ा से बचना चाहिए।

5. इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान दक्षिणा देनी चाहिए।

6. एकादशी के व्रत के रूप में सिर्फ फलाहार करना चाहिए और इसके अलावा दूध या दूध से बनी मिठाई का सेवन आप कर सकते हैं।

7. एकादशी के व्रत के रूप में किसी को मनुष्य को हल्दी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

8. एकादशी के दिन सुबह कैमिकल युक्त दातुन नहीं करना चाहिए, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें।

9. एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है।

10. इसके अलावा मांस-मदिरा का भी 15 जुलाई से ही त्याग कर दें।

शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि

चलिए अब बात करते हैं कामिका एकादशी व्रत के शुभ मुहर्त और पूजा विधि की –

कामिका एकादशी का व्रत दशमी की तिथि से ही शुरू हो जाता है। एकादशी की तिथि को स्नान करने के बाद पूजा आरंभ करने से पहले व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु के उपेंद्र अवतार की पूजा आरंभ की जाती है। व्रत के दौरान भगवान विष्णु की प्रिय वस्तुओं पीले वस्त्र और फल प्रयोग में लाएं। इसके अलावा दूध, पंचामृत आदि भगवान विष्णु को अर्पित करना चाहिए। अगर कामिका एकादशी व्रत के शुभ मुहूर्त की बात करें तो एकादशी तिथि प्रारम्भ 15 जुलाई को शाम 10 बजकर 19 मिनट से 16 जुलाई को 11 बजकर 44 मिनट तक होगा।

कामिका एकदशी का एक विशेष महत्व है। महाभारत काल में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों को एकादशी के महत्व के बारे में बताया था कि कैसे कामिका एकादशी का व्रत रखने और पूजा करने से जीवन से हर प्रकार के कष्टों का नाश हो जाता है। सुख समृद्धि मिलती है। जीवन में सफलता प्राप्त होती है इतना ही नहीं इस व्रत से पितृ भी प्रसन्न होते हैं।

क्या है व्रत की कथा?

अब आपको कामिका एकादशी व्रत की कथा बताते हैं। कहते हैं युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि हे प्रभु श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में जो एकादशी आती है, वो कौन सी एकादशी है और उसकी क्या कथा है, कृपा करके मुझे बताएं। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि हे राजन सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी और पिवत्रा एकादशी भी कहते हैं और इस दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र स्वरुप की पूजा की होती है। इस एकादशी का व्रत करने से पूर्वजन्म की समस्याएं दूर होती है और हजार गौ दान के समान पुन्य फल की प्राप्ति होती इसके साथ ही जीवन में सुख समृद्धि आती है। कथा के अनुसार किसी गांव में एक ठाकुर और एक ब्राह्मण रहते थे। दोनों की एक दूसरे से बिल्कुल नहीं बनती थी। एक दिन उस ठाकुर का ब्राह्मण से झगड़ा हो गया और क्रोध में आकर उसने ब्राह्मण की हत्या कर दी। ब्रह्महत्या के पाप से दुखी उस ठाकुर ने ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहा, लेकिन अन्य ब्राह्मणों ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। ब्रह्म हत्या का दोषी होने के कारण ब्राह्मणों ने उसके यहां भोजन करने से इंकार कर दिया। इससे परेशान उस ठाकुर ने एक ऋषि से इस पाप के निवारण का उपाय जानना चाहा। इस पर ऋषि ने उसे कामिका एकादशी व्रत करने को कहा। इसके बाद उस ठाकुर ने ऋषि की आज्ञा अनुसार कामिका एकादशी का व्रत किया। उसके व्रत से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे दर्शन दिए और कहा ठाकुर तुम्हारे सभी पापों का प्रायश्चित हो गया है और अब तुम ब्राह्मण हत्या के पाप से मुक्त हो। इस तरह ठाकुर ब्राह्मण हत्या के पाप से मुक्त हो गया।

इसीलिए तो कहते हैं कि कामिका एकादशी व्रत करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है। ये एकादशी को आध्यात्मिक साधकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्रत चेतना से सभी प्रकार की नकारात्मकता को नष्ट करता है और हृदय को दिव्य प्रकाश से भर देता है। एकादशी व्रत का महत्व तीनों लोक में सबसे प्रसिद्ध है। यदि आप किसी भी तरह के श्राप, पितृ दोष से ग्रसित है और उससे मुक्ति पाना चाहते हो तो यह दिन बहुत खास है। आप भी एकादशी व्रत रखें और व्रत का अच्छे से पालन करें। आप को सभी पापों से मुक्ति मिल जाएगी।

वीडियो 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here