कजरी तीज जानिए इससे जुड़ी परम्पराएं, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कजरी तीज
भादो महीने की शुल्क पक्ष की तृतीय तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है, इसीलिए इसे भादो तीज भी कहते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक यह तिथि जुलाई या अगस्त के महीने में आती है। इस बार कजरी की तीज 6 अगस्त 2020 को होगी। हरतालिका तीज और हरियाली तीज की तरह ही कजरी तीज भी सुहागन स्त्रियों के लिए एक खास त्यौहार है।
यह त्यौहार ज्यादातर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में खास तौर पर मनाया जाता है। कई जगहों पर कजरी तीज को सातुड़ी तीज और बूढ़ी तीज के नाम से भी कहते हैं। सुहागन महिलाएं इस दिन अपने वैवाहिक जीवन के सुख और पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।

कजरी तीज की परंपराएं

कजरी तीज पर बहुत-सी परम्पराएं मनाई जाती है, चलिए जानते हैं इनके बारे में…
  1. तीज के दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। यह इस दिन की की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा है। इसके साथ ही कुंवारी लड़कियां भी अच्छा और योग्य वर पाने के लिए इस दिन व्रत रखती हैं।
  2.  इस दिन गायों खासतौर से पूजा होती है। जिसमें गाय को आटे की 7 लोहिया बनाकर, उस पर घी और गुड़ रखकर खिलाई जाती है। उसके बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है।
  3. कजरी तीज के दिन चने, गेहूं, जौ और चावल के सत्तू में मेवा और घी मिलाकर कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। शाम को चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को इन सभी पकवानों का भोग लगाया जाता है। फिर भोजन करके व्रत खोला जाता है।
  4. कजरी तीज के दिन महिलाएं झूला लगाती हैं नाचती गाती है और झूला झूलती हैं
  5. बिहार और यूपी में पारंपरिक कजरी गीत गाकर यह पर्व मनाया जाता है।
  6. कजरी तीज की परंपरा के अनुसार जो भी सुहागिन स्त्री इस दिन व्रत रखती है। उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती की ओर से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है और उनका वैवाहिक जीवन सदैव सुखमय बना रहता है।

कजरी तीज की पौराणिक मान्यता

पौराणिक मान्यता के अनुसार मध्य भारत में एक कजली नाम का वन था। वहां के राजा की असमय ही मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद राजा के वियोग में रानी ने भी खुद को सती कर लिया था। यह देखकर उनकी प्रजा बहुत ही दुखी हुई । रानी का अपने पति के प्रति ऐसा प्यार देखकर सभी बहुत प्रभावित हुए और उनके इस प्रेम को देखकर कजरी गीत बनाए गए।
मान्यता है कि यह गीत पति पत्नी के प्रेम का प्रतीक है और कजरी तीज मनाने की परंपरा से शुरू हुई। इस दिन शाम को व्रत खोलने से पहले सुहागिन स्त्रियां सात रोटियों पर गुड़ और चना रखकर, पहले गाय को खिलाती हैं और फिर अपना व्रत खोलती हैं।

शुभ मुहूर्त

कजरी तीज की तृतीया तिथि का प्रारंभ 5 अगस्त 2020 को रात 10 बज कर 50 मिनट से शुरू होकर 7 अगस्त 2020 की रात 12 बज कर 14 मिनट तक रहेगा।

पूजा विधि

  1. कजरी तीज के दिन व्रत करने वाली स्त्रियों को सुबह जल्दी उठ कर स्नान करना चाहिए और नए वस्त्र पहनने चाहिए।
  2. कजरी तीज का त्यौहार पति की लंबी आयु के लिए होता है, इसीलिए इस दिन सुहागिन स्त्रियों को सोलह। श्रृंगार करना चाहिए।
  3. इस दिन शाम के समय निमन माता की पूजा की जाती है। जिसमें शाम के समय निर्माण माता की पूजा करने से पहले रोली और जल के छींटे मारकर माता का आवाहन करना चाहिए।
  4. नीमड़ी माता के पीछे की दीवार पर रोली और मेहंदी की 13- 13 बिंदिया अपनी अनामिका उंगली से लगानी चाहिए और तर्जनी उंगली से 13 काजल की बिंदी लगानी चाहिए।
  5. इसके बाद नीमड़ी माता को सोलह सिंगार और वस्त्र अर्पित करनी चाहिए।
  6. फिर एक नीमड़ी माता को कलश में पानी भरकर उस पर रोली बांध कर और कुछ दक्षिणा भी अर्पित करें।
  7. फिर शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा स्थल पर बने या किसी तालाब के किनारे पर एक दिया जलाएं और उसके उजाले में नीम की डाली पकड़ी नींबू और नाक की नथ साड़ी का पल्ला देखें इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।

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