जन्माष्टमी पर रखें इन नियमों का ध्यान, भूलकर भी न करें ये काम

जन्माष्टमी

हिंदू शास्त्रों के अनुसार जब -जब धरती पर अधर्म की धर्म पर जीत और झूठ का बोलबाला होता है, तब-तब तक मनुष्यों की रक्षा के लिए भगवान इस धरती पर किसी न किसी रूप में अवतार जरूर लेते हैं। इसी तरह द्वापर युग में भी श्री हरि विष्णु ने क्रूर कंस से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया था। धरती पर उनका जन्म भाद्रपद की कृष्ण अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि में हुआ था। श्री कृष्ण के जन्म दिवस को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

कोई इस दिन को जन्मोत्सव के रूप में मनाता है तो कोई श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में। इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी 12 अगस्त 2020 को है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करने से सभी दुखों का अंत हो जाता है और निसंतान दंपत्ति को संतान की प्राप्ति होती है। यदि आप भी जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले हैं, तो इस व्रत के नियमों को अवश्य जानने लें।

मंत्र

ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम

  1. यदि आप श्री जन्माष्टमी का व्रत रख रहे हैं तो इस के व्रत के नियमों का पालन 1 दिन पहले यानी कि सप्तमी तिथि से ही करना चाहिए।
  2. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र पहनने चाहिए।
  3. इसके बाद हाथ में गंगाजल या शुद्ध जल लेकर कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके साथ ही “ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये”॥ इस मंत्र का भी जाप करना चाहिए।
  4. श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत अष्टमी तिथि को सुबह से शुरू होकर रात को 12:00 बजे तक रहता है यानी कि रात को 12:00 बजे श्री कृष्ण के जन्म के बाद आप अपने व्रत को खोलकर भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
  5. दोपहर के समय पानी में काले तिल डालकर उस से स्नान करना चाहिए। फिर माता देवकी के लिए सूची सूतिका ग्रह की जगत तैयार करनी चाहिए।
  6. इसके बाद मंदिर या जहां पर भी आपको पूजा करनी है, वहां पर लड्डू गोपाल की कोई मूर्ति या फोटो स्थापित करें।
  7. अगर लड्डू गोपाल की कोई ऐसी प्रतिमा या फोटो हो, जिसमें वह माता देवकी की गोद में हों और माता लक्ष्मी उनके चरण छू रही हो। ऐसी फोटो या मूर्ति स्थापित करने से व्रत का उत्तम फल मिलता है।
  8. ध्यान रहे, पूजा करते समय माता देवकी वासुदेव नंद यशोदा बलदेव और माता लक्ष्मी सभी का स्मरण करें।
  9. फिर रात्रि के समय 12:00 बजने से पहले श्री कृष्ण के जन्म की तैयारी करनी चाहिए। जिससे कि रात्रि के 12बजे भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप का जन्म करवा कर उनकी पूजा समय पर की जा सके।
  10. फिर 12 बजे,जन्म के बाद लड्डू गोपाल का पंचामृत और शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए उनको नए वस्त्र पहनाने चाहिए और उनका अच्छे से श्रृंगार करना चाहिए।
  11. इसके बाद श्री कृष्ण के बाल रूप को फूल और तुलसी के पत्ते अर्पित करने चाहिए।
  12. फिर श्री कृष्ण के बाल रूप की अच्छे से आरती उतारने चाहिए और उनके सम्मुख अपने इच्छा या मनोकामना रखनी चाहिए, जिससे कि वह आपकी मनोकामना को पूर्ण कर सकें।
  13. फिर उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाना चाहिए।
  14. ध्यान रहे कि जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्री कृष्ण को झूला झुलाए बिना पूरा नहीं होता, इसीलिए जन्म के बाद उन्हें झूला अवश्य झूलना चाहिए।
  15. यह सब हो जाने के बाद आप अपनी व्रत का पारण पारण कर सकते हैं।

इस तरह से जन्माष्टमी के दिन इन सभी नियमों का पालन करने से आपका व्रत पूर्ण हो जाएगा और श्री कृष्ण आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करेंगे।

जन्माष्टमी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम

जन्माष्टमी का व्रत सच्ची श्रद्धा के साथ रखना चाहिए। कुछ ऐसे कार्य भी होते हैं जिन्हें इस दिन भूलकर भूलकर भी नहीं करना चाहिए, तो चलिए जानते हैं कि ऐसी कौन सी बातें हैं। जिनका हमें जन्माष्टमी के व्रत के दिन विशेष ध्यान रखना चाहिए।

  1. श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल के बाल रूप की पूजा अर्चना की जाती है। इसीलिए इस दिन अपने घर के बच्चों या किसी के भी बच्चों को ना तो डांटे और ना ही मारें।
  2. इस दिन किसी का भी अपमान ना करें यानी कि अपने मन में किसी के प्रति कोई नकारात्मक भावना आने दें।
  3. जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म लेने तक आपको सोना नहीं चाहिए बल्कि श्री कृष्ण का ध्यान करना चाहिए।
  4. जन्माष्टमी के व्रत के दिन भोग विलास और काम भावना से खुद को दूर रखें।
  5. इस दिन प्याज, लहसुन, मूल और मसूर दाल का सेवन करने से बचें।
  6. जन्माष्टमी के व्रत वाले दिन किसी से झूठ ना बोलें और ना ही किसी का अपमान करें।
  7. जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को मांस-मदिरा, तंबाकू और पान-सुपारी से भी इस दिन परेश करना चाहिए।
  8. कोई भी व्रत यदि साफ मन से ना किया जाए, तो भगवान ऐसे व्रत को स्वीकार नहीं करते। इसीलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सच्चे मन और श्रद्धा से भगवान श्री कृष्ण के व्रत का पालन करना चाहिए।

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