रंडी की मस्जिद बिजली गिरने से ढही, जानिए क्यों पड़ा ये नाम?

दिल्ली में बाढ़ के हालात के चलते यहाँ की ऐतिहासिक रंडी की मस्जिद बिजली गिरने के कारण ढह गई है। आइये जानते हैं कि इस मस्जिद का ऐसा नाम कब और क्यों पड़ा…

19 जुलाई को दिल्ली में हुई रिकॉर्डतोड़ बारिश ने सब कुछ तहस नहस करके रख दिया। दिल्ली में बारिश के बाद जलभराव और ट्रैफिक जाम तो आम बात है, लेकिन इस बार बारिश में 4 से ज़्यादा लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है। साथ ही बिजली गिरने जैसी घटनाएं भी निकलकर सामने आ रही हैं।

200 साल पुरानी है इमारत

दरअसल, हुआ ये कि 19 जुलाई की सुबह 6 बजे हौज़ खासी इलाके में आकाशीय बिजली गिरी जिसके कारण एक ऐतिहासिक मस्जिद का गुम्बद क्षतिग्रस्त हो गया। इस मस्जिद का नाम मुबारक बेगम मस्जिद है लेकिन आज भी लोग इसे इसके पुराने नाम ‘रंडी की मस्जिद’ के नाम से जानते हैं।

दिल्ली की हेरिटेज इमारतों में शुमार इस मस्जिद का इतिहास 200 सालों से भी पुराना है बिजली गिरने से इसका बीच वाला हिस्सा जिसे गुम्बद कहा जाता है, वो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।

क्यों पड़ा “रंडी की मस्जिद” नाम?

इस मस्जिद का नाम ‘रंडी की मस्जिद’ क्यों पड़ा आइये विस्तार से जानते हैं। आपको बता दें कि ये बात है करीब 200 साल पुरानी है। उस वक़्त भारत से मुगलों का पतन हो रहा था। ब्रिटिश साम्राज्य का उदय हो रहा था। ब्रिटिश धीरे-धीरे पूरे भारत पर काबिज़ हो चुके थे।

उस वक़्त डेविड ऑक्टरलॉनी नाम का एक ब्रिटिश शासक भारत में एक मुख्य प्रशासक बन गया था। इसके साथ ही डेविड दिल्ली के पहले ब्रिटिश निवासी थे। दिल्ली पर प्रभाव रखने वाले डेविड ऑक्टरलॉनी की कुल 13 बीवियाँ थीं। इनमें से एक मुबारक बेगम भी थीं। मुबारक बेगम इन 13 बीवियों में से सबसे छोटी थीं।

मुस्लिम नहीं थीं मुबारक बेगम

बताया जाता है कि मुबारक बेगम के नाम पर ही इस मस्जिद का नाम रंडी की मस्जिद रखा गया। जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि मुबारक बेगम असलियत में मुसलमान नहीं थीं। वह एक मराठा परिवार से ताल्लुक रखती थीं। पुणे में रहा करती थीं। मुबारक बेगम नृत्य कला में निपुण थीं। यही कारण है कि वो दिल्ली आकर मुगलों के दरबार मे नृत्य करने लगीं। मुगलों के बीच रहते-रहते उन्होंने इस्लाम अपना लिया।

इसके बाद मुबारक बेगम ने अपनी छवि कट्टर मुस्लिम वाली बनानी शुरू कर दी। इसी दौरान मुबारक बेगम की नजदीकियां डेविड से बढ़ने लगीं। जिसके बाद दोनों ने इस्लामिक रिवाज़ो से शादी कर ली। दोनों कुछ साल साथ रहे। उनके बच्चे भी हुए लेकिन कुछ ही सालों बाद मुबारक बेगम की मौत हो गई।

पत्नी की याद में बनवाई मस्जिद

13 बीवियों में सबसे ज़्यादा लगाव डेविड को मुबारक बेगम से था। उसके जाने का भी सबसे ज़्यादा गम डेविड को हुआ। जिसके बाद डेविड ने मुबारक बेगम के इस्लाम से लगाव के कारण मुगल बाग में एक मस्जिद भी बनवाई। इसी का नाम मुबारक बेगम के नाम पर मुबारक बेगम मस्जिद रखा।

कट्टर मुस्लिमों ने रखा नाम

लेकिन कट्टर मुस्लिम लोग फिर भी मुबारक बेगम को उसके पेशे के साथ जोड़ कर ही देखते रहे और उन्होंने उसका नाम ‘रंडी की मस्जिद’ रख दिया। बहुत समय तक इस मस्जिद में मुस्लिमों ने प्रवेश नहीं किया क्योंकि वो मुबारक बेगम को तवायफ मानते थे। उसके नाम पर मस्जिद को मस्जिद का अपमान मानते थे। यही कारण है मुस्लिम उसे रंडी की मस्जिद ही बोलते रहे।

नतीजा ये हुआ कि इस मस्जिद का संबंध इतिहास से होने के कारण इसे महत्व तो दिया जाने लगा, लेकिन इसका नाम रंडी की मस्जिद ही पड़ गया।

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