गणेश चतुर्थी की कथा, शुभ मुहूर्त, प्रतिमा स्थापना और पूजा विधि

गणेश चतुर्थी

पूरे देश में जैसे पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा मनाई जाती है, वैसे ही महाराष्ट्र की गणेश चतुर्थी का त्यौहार भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। उत्तर भारत में गणेश चतुर्थी को श्री गणेश की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सभी के कष्टों और दुखों का हरने के कारण गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन धूमधाम से गणेश जी को अपने घर में घर में स्थापित किया जाता है। गणेश चतुर्थी का यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और 11 दिन गणेश जी को विसर्जित किया जाता है।

10 दिनों तक चलने वाले इस गणेश महोत्सव को गणेशोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप भी गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी को अपने घर में विराजित करना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले गणेश चतुर्थी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जान लेना चाहिए। जिससे कि आप शुभ मुहूर्त पर गणेश जी को घर में लाकर विराजमान कर सकें। आज हम आपको गणेश चतुर्थी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में भी बताएंगे।

गणेश चतुर्थी यानी गणेश जन्मोत्सव

हर साल भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी का यह उत्सव 22 अगस्त 2020 को है। पुराणों हिंदू धर्म शास्त्रों और पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालु अपने घरों में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को स्थापित करते हैं और पूरे 10 दिन तक गजानंद की श्रद्धा पूर्वक और विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं।

शास्त्रों के अनुसार गणपति बप्पा संकट, दरिद्रता, कष्ट और रोगों से मुक्ति दिलाने वाले देवता हैं, इसीलिए जिन लोगों के जीवन में कोई कष्ट होता है या वह किसी तरह के रोग से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो वह लोग गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी की पूजा अर्चना अवश्य करते हैं। इसके साथ ही गणेश जी को रिद्धि -सिद्धि और सुख- समृद्धि का देव भी कहा जाता है। जिनके जिनकी विशेष कृपा से आप सभी अपनी मनोकामना को पूर्ण कर सकते हैं। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता की पूजा विधि विधान से करने और व्रत रखने से बप्पा जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और सभी को मनवांछित वरदान देते हैं।

गणेश चतुर्थी का महत्व

भाद्रपद महीने की शुल्क पक्ष की चतुर्थी से गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना के साथ-साथ ही गणेशोत्सव का शुभारंभ हो जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन ढोल नगाड़ा के साथ गणेश जी की प्रतिमा को घर में स्थापित किया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन से लगातार 10 दिनों यानी अनंत चतुर्थी के दिन तक गणेश जन्मोत्सव का त्योहार मनाया जाता है। अनंत चतुर्थी के दिन गणेश घर में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का पूजा अर्चना और विधि विधान के साथ विसर्जन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार जिस घर में भगवान गणेश जी विराजित होते हैं, वहां पर सुख-शांति, संपत्ति और धन स्वयं ही चलाता है।

मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन व्रत करने और सच्ची श्रद्धा से पूजा अर्चना करने से घर परिवार की सारी विपदाएं दूर हो जाती हैं। गणपति बप्पा अपने भक्तों को सुख-संपदा का विशेष आशीर्वाद देते हैं। गणेश चतुर्थी का व्रत बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। कहते हैं कि एक बार महादेव और माता पार्वती ने भी 21 दिनों तक गणेश जी की पूजा अर्चना की और व्रत रखा,जिस कारण उनकी भी मनोकामना पूरी हुई थी। अगर आपके मन में भी कोई इच्छा है या आपके परिवार में कोई समस्या है, जिससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो आप भी गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी का व्रत रखें और उनकी पूजा-अर्चना अवश्य करें। विघ्नहर्ता आपकी सभी समस्याओं का अंत कर देंगे और आपकी मनोकामना को भी पूर्ण करेंगे।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माता पार्वती सोचती हैं, कि उनका कोई पुत्र नहीं है। फिर माता अपने मैल से एक बालक की मूर्ति बनाती है और उसमें अपनी शक्तियों से प्राण डालकर, जीवित कर देती हैं। माता उस बालक को आदेश देती हैं, कि किसी भी कीमत में किसी को भी कंदरा के कुंड में प्रवेश ना करने दें। जिसके बाद माता कंदरा में स्थित कुंड में स्नान करने के लिए चली जाती हैं। बालक माता के आदेशानुसार कंदरा के द्वार पर खड़े होकर पहरा देने लग जाता है। वहां एक-एक कर बहुत से लोग आते हैं, लेकिन वह बालक किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं करने देता। इसी तरह बहुत समय बीत जाता है।

फिर भगवान शिव वहां आते पहुंचते हैं और कंदरा में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ते हैं, तो वह बालक उन्हें रोक देता है। महादेव के लाख समझाने पर भी वह बालक उनकी एक नहीं सुनता और उन्हें अंदर प्रवेश नहीं करने देता। जिस कारण महादेव क्रोधित हो जाते हैं और अपने त्रिशूल से उस बालक का शीश धड़ से अलग कर देते हैं। जब माता पार्वती तक उस बालक की मृत्यु का समाचार पहुंचता है, तो वह स्नान अधूरा छोड़ कर बाहर आती है और देखती है कि उनका पुत्र धरती पर लहूलुहान पड़ा हुआ है। उसका शरीर और धड़ अलग-अलग गिरे हुए हैं।जिसे देखकर माता बहुत क्रोधित हो जाती हैं और रौद्र रूप धारण कर लेती हैं। जिसको देखकर बाकी सभी देवता भयभीत हो जाते हैं और महादेव से प्रार्थना करते हैं, कि वह उस बालक को जीवित कर दें।

तब भगवान शिव अपने गणों को आदेश देते हैं, कि वह ऐसे बालक का शीश लेकर आए जिसका जन्म अभी-अभी हुआ हो और उसकी इसकी माता की पीठ अपने बालक की ओर हो। थोड़ी ही देर बाद भगवान शिव के गण एक हथिनी के बालक का शीश लेकर आते हैं। जिसे महादेव बालक के धड़ से जोड़ देते हैं और बालक जीवित हो जाता है। लेकिन बालक के जीवित होने पर भी माता पार्वती का गुस्सा शांत नहीं होता, वह महादेव से कहती हैं, कि मेरे बालक का धड़ 1 गज का है। जिसके कारण सभी उसका मजाक उड़ाएंगे या तिरस्कार करेंगे। तब भगवान महादेव बालक को वरदान देते हैं कि आज से यह संसार तुम्हें गणपति के नाम से जानेगा।

इसके बाद सभी देवता एक-एक कर बालक को कोई ना कोई वरदान देते हैं। कोई गणपति जी को धन-संपदा,सुख और ज्ञान का आशीर्वाद देता है तो कोई उन्हें मांगलिक कार्यों को करने से पहले उनकी पूजा का करने का आशीर्वाद देता है। इस तरह एक ही दिन में माता पार्वती के पुत्र को दो बार जीवन मिलता है।

गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी के दिन शुभ मुहूर्त देखकर गणपति बप्पा की प्रतिमा को घर में स्थापित किया जाता है। विधि विधान से 10 दिनों तक उसकी पूजा अर्चना की जाती है और 11 दिन उसे विधि विधान से विसर्जित कर दिया जाता है। इस साल 22 अगस्त 2020 को गणेश चतुर्थी का यह उत्सव मनाया जाएगा, तो चलिए जानते हैं इस दिन के शुभ मुहूर्त के बारे में…

चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 21 अगस्त 2020 को रात्रि 11:02 से शुरू हो जाएगा।

गणेश चतुर्थी तिथि का समापन 22 अगस्त 2020 को शाम 7:56 पर होगा।

गणेश चतुर्थी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:07 से दोपहर 1:41 तक रहेगा।

चंद्र दर्शन से बचने का समय 22 अगस्त 2020 को सुबह 9:07 से रात के 9:26 तक रहेगा।

मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में चंद्रमा का दर्शन नहीं किया जाता यानी चंद्र दर्शन वर्जित होता है। इसीलिए इन 10 दिनों तक चंद्रमा को देखने से बचें।

पूजा विधि

गणेश चतुर्थी की शुभ मुहूर्त के बाद अब गणेश जी की पूजा विधि के बारे में जानते हैं।

  1. गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर पूरे घर की अच्छे से साफ सफाई करनी चाहिए। गंगाजल छिड़ककर घर को शुद्ध करना चाहिए और गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करने के लिए उनका पूजा स्थान तैयार करना चाहिए। फिर नहा धोकर नए वस्त्र पहनने चाहिए।
  2. इस दिन के शुभ मुहूर्त के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा को घर में धूमधाम से स्थापित करना चाहिए।
  3. पूजा स्थान में गणेश जी की मूर्ति की प्रतिमा स्थापित करने से पहले एक कलश में पानी भरकर उसमें सुपारी डालें और किसी कोरे वस्त्र से बांधकर एक चौकी पर रख दें और फिर गणेश जी की प्रतिमा को उसके पास स्थापित कर दें।
  4. उसके बाद गणेश जी को सिंदूर- दूर्वा अर्पित करें। उसकी आरती उतारें।फिर बप्पा को 21 लड्डुओं का भोग लगाएं और फिर जिसमें से 5 शब्दों को छोड़कर बाकी के सभी लड्डुओं को गरीबों में बांट दें।
  5. गणेश जी की पूजा करने का शुभ समय, शाम का माना जाता है इसीलिए शाम को विधि विधान से गणेश जी की पूजा अर्चना करें उनकी कथा सुनेंयापढ़ें और हो सके तो गणेश चालीसा का पाठ भी करें।
  6. ध्यान रहे जब तक आपके घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है उन दिनों तक चंद्रमा के दर्शन करने से बचें। इस तरह रोजगणेश जी की पूजा अर्चना करें और फिर 5वें, 7वें या 11वें दिन प्रतिमा का विधि विधान से विसर्जन कर दें। ऐसा करने से गणेश जी आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करेंगे और आपके जीवन में चल रही समस्याओं को तुरंत हर लेंगे।

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