गणेश विसर्जन के बारे में ये बातें जानना है बहुत ज़रूरी

गणेश विसर्जन

जिस तरह गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना बड़ी धूमधाम से की जाती है। उसी तरह भगवान गणेश के विसर्जन को भी बहुत महत्व दिया जाता है और धूमधाम से गजानंद का विसर्जन किया जाता है। जैसा कि सभी जानते हैं गणेश चतुर्थी के दिन गणेश गणेश की मूर्तियों को अपने घर या सार्वजनिक तौर पर पंडाल बनाकर स्थापित किया जाता है। फिर 5,7 या 11 दिनों के बाद उन्हें विधि-विधान पूर्वक विसर्जित कर दिया जाता है। मान्यता है कि विसर्जन के दौरान गणपति जी अपने साथ घर और परिवार की सभी बाधाओं को ले जाते हैं और परिवार में सुख और वैभव बना रहता है। गणेश चतुर्थी के इस महापर्व का समापन गणेश विसर्जन के साथ हो जाता है। इसे अनंत चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाता है।

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

शास्त्रों की मानें तो भगवान गणेश की स्थापना करने के बाद विधि-विधान पूर्वक उनका अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करने से मनुष्य के जीवन की सभी समस्याएं समाप्त हो जाती है और उनके जीवन खुशियों से भर जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी और गणेश जी की प्रतिमाओं के विसर्जन का दिन 1 सितंबर 2020 को है। चलिए आपको अब गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त का समय बताते हैं।

• अनंत चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 31 अगस्त 2020 को सुबह 8:48 से हो जाएगा और इसकी समाप्ति 1 सितंबर 2020 को सुबह 9:38 पर हो जाएगी।

• अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की प्रतिमाओं को विसर्जित करने का पहला शुभ मुहूर्त 1 सितंबर 2020 को सुबह 9:10 से शुरू होकर दोपहर 1:56 तक रहेगा।

• दूसरा शुभ मुहूर्त 1 सितंबर 2020 को दोपहर 3:32 से शाम को 5:07 तक रहेगा।

• तीसरा शुभ मुहूर्त 1 सितंबर 2020 को रात 8:07 से रात 9:32 तक रहेगा।

• चौथा शुभ मुहूर्त 1 सितंबर 2020 की रात 10:56 से 2 सितंबर 2020 की सुबह 3:10 तक रहेगा।

आप इन चारों शुभ मुहूर्त में से किसी भी एक शुभ मुहूर्त पर अपने घर या पंडाल के गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर सकते हैं।

गणेश विसर्जन की पूजा विधि

आपने गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना का जितनी दिनों का संकल्प लिया है। उसी के अनुसार आपको उनका विसर्जन करना चाहिए। जिस तरह भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करने के लिए पूजा विधि होती है। उसी तरह उनका विसर्जन करने के लिए भी विशेष तरह की पूजा विधि की जाती है, तो चलिए अब गणेश विसर्जन की पूजा प्रक्रिया के बारे में जानते हैं।

  1. गजानंद की मूर्ति का विसर्जन करने से पहले उनकी प्रतिमा की उसी तरह से पूजा करनी चाहिए। जैसे गणेश चतुर्थी से लेकर आपने अभी तक की है । फिर उन्हें उनकी प्रिय वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए।
  2. इसके बाद एक साफ करा लें और उससे गंगाजल या गौमूत्र छिड़ककर पवित्र कर लें। फिर घर की किसी स्त्री से उस पर स्वास्तिक का चिन्ह बनवाएं। पटरे पर एक गुलाबी, लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछा दें।
  3. वस्त्र बिछड़ने के बाद पटेल के चारों कोनों पर सुपारी रखनी चाहिए। फिर पटरे को गुलाब की पंखुड़ियों या फूलों से सजाना चाहिए।
  4. इसके बाद गणपति बप्पा मोरिया बोलते हुए गणेश जी की मूर्ति को अपने स्थापना वाले स्थान से उठाकर इस पटरी पर विराजित कर दें। इसके साथ ही कुछ फल, फूल, वस्त्र, श्रद्धानुसार दक्षिणा और पांच मोदक इस पटरी पर रखने चाहिए।
  5. फिर एक छोटी सी लकड़ी पर गेहूं, चावल और पंचमेवा की एक छोटी सी पोटली बनाकर बांधे दें। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि भगवान श्री गणेश को रास्ते में किसी भी तरह की कोई समस्या के सामना न करना पड़े।
  6. विसर्जन के स्थान पर पहुंचकर सबसे पहले गणेश जी की कपूर से आरती करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें। फिर ढोल नगाड़ों के साथ गणेश जी का जयकारा लगाते हुए गणेश जी की प्रतिमा को धीरे-धीरे पानी में विसर्जित कर दें।
  7. ध्यान रहे गजानन की प्रतिमा को विसर्जित करते समय उसे फेंके नहीं बल्कि आदर और सम्मान के साथ धीरे-धीरे विसर्जित करना चाहिए। प्रार्थना करनी चाहिए कि अगले साल वह और भी ज्यादा खुशियों के साथ आपके घर में विराजमान होने के लिए जल्द ही पधारें।

गणेश विसर्जन की पौराणिक कथा

गणेश विसर्जन से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन से कि महर्षि वेदव्यास जी ने गणेश जी को लगातार 10 दिनों तक महाभारत की कथा सुनाई थी। जिसे भगवान श्री गणेश ने लगातार लिखा था। कहते हैं कि जब दसवें दिन वेदव्यास जी की आंख खुली, तो उन्होंने देखा कि गणेश जी का शरीर बहुत ही ज्यादा गर्म हो चुका है। जिसके बाद उन्होंने अपने पास के ही एक सरोवर के जल से गणेश जी के शरीर को ठंडा किया। तभी से गणेश जी को अनंत चतुर्दशी के दिन शीतल जल में विसर्जित करने का विधान है।

कथा के अनुसार गणेश जी के शरीर का तापमान ज्यादा ना बड़ी इसके लिए वेदव्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित मिट्टी का लेप भी लगाया था। लेकिन मिट्टी सूख जाने पर भगवान श्री गणेश का शरीर अकड़ गया था। जिस कारण उन्होंने उस सरोवर में जाकर स्नान किया था। मान्यता है कि इन 10 दिनों तक वेदव्यास जी ने गणेश जी को उनकी पसंद का भोजन करवाया था तभी से गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को घर में स्थापित किया जाता है और 10 दिनों बाद उनकी प्रतिमा को ठंडे जल जल में विसर्जित कर दिया जाता है। इस दौरान 10 दिनों तक गणेश जी की विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है और उनके मनपसंद भोग लगाए जाते हैं।

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