माला का जाप करते समय ध्यान रखें ये नियम और सावधानियां

माला

हम अपने ईश्वर या इष्ट देव की प्रार्थना करने के लिए अलग-अलग तरीकों को अपनाते हैं। जिनमें भजन कीर्तन पूजा-पाठ व्रत करना या मंत्रों का जाप करना शामिल है। मंत्र जाप से एकाग्रता बढ़ती है, जिससे हम अपने ईश्वर से जल्दी कनेक्ट हो पाते हैं और हमारी प्रार्थना ईश्वर जल्द ही सुन लेते हैं। इसीलिए मंत्रोच्चारण को सबसे प्रभावशाली माना जाता है। जिस तरह अलग-अलग मंत्रों को करने का अलग-अलग प्रभाव होता है, वैसे ही अलग-अलग मंत्रों के जाप के लिए विभिन्न माला का प्रयोग किया जाता है। मालाओं का प्रयोग करने से मंत्र जाप की संख्या में होने वाली गड़बड़ी से भी बचा जा सकता है।

श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और मंत्र के हिसाब से मालाओं का चुनाव करते हैं। मालाओं में लगे हुए दानों को मनका कहा जाता है। वैसे तो मालाओं में 108 मनके होते हैं। लेकिन कुछ मालाएं 27 या 54 मनके की भी होती हैं। आप अपने मंत्र और उनके जाप की संख्या के अनुसार अपनी माला का चयन कर सकते हैं। आज हम आपको माला का जाप करते समय ध्यान रखने वाली सावधानियों और नियमों के बारे में बताएंगे। इसके अलावा हम आपको विभिन्न मालाओं के प्रभाव और प्रकार के बारे में भी बताएंगे।

सावधानियां और नियम

  1. सबसे पहले तो माला का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखें, कि उसमें मनकों की संख्या कम से कम 27 और अधिक से अधिक 108 तक होनी चाहिए और हर मनके के बीच में एक गांठ जरूर होनी चाहिए।
  2. मंत्र का जाप करते समय आप की माला किसी भी वस्त्र से ढकी होनी चाहिए।
  3. किसी भी मंत्र का जाप शुरू करने से पहले हाथ में माला को लेकर प्रार्थना करनी चाहिए, कि किया गया मंत्र का जाप सफल हो जाए।
  4. जिस माला से आप मंत्र का जाप करते हैं। उस को धारण नहीं करना चाहिए। यदि आपको माला धारण करनी ही है, तो आप दूसरी माला धारण कर सकते हैं।
  5. मंत्र का जाप करने के बाद मालाओं को हमेशा मंदिर में ही रखना चाहिए।
  6. मंत्र का जाप करने के लिए हमेशा अपनी ही माला का प्रयोग करना चाहिए। ना तो हमें वह किसी और को देनी चाहिए। इसके अलावा ना ही किसी और की उस का प्रयोग अपने मंत्रों के जाप के लिए करना चाहिए।
  7. ध्यान रहे, मंत्र का जाप करते समय उसे नीचे नहीं करना चाहिए। नहीं तो यह अशुभ माना जाता है।
  8. कभी भी माला को जमीन पर ना रखें। इसे हमेशा मंदिर, किसी डिब्बे या कपड़े में लपेट कर ही रखें।

मंत्र जाप की मालाओं के प्रकार

हर मंत्र का जाप करने के लिए अलग माला का इस्तेमाल किया जाता है। इन मालाओं का प्रभाव भी अलग-अलग होता है। जिसके कारण हमारे मंत्र जल्दी से सिद्ध हो जाते हैं और हमारी मनोकामनाएं अभी तुरंत पूर्ण हो जाती हैं। हम ईश्वर से शीघ्र जुड़ जाते हैं। हमारा मन ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाता है। चलिए अब मालाओं के विभिन्न प्रकार और उनसे होने वाले लाभ के बारे में जानते हैं।

तुलसी की माला

तुलसीमाला का सबसे ज्यादा महत्व वैष्णव परंपरा में माना जाता है। इसको धारण करने के बाद वैष्णव परंपरा का पालन करना अति आवश्यक होता है। भगवान विष्णु या उनके किसी अवतार के मंत्रों का जाप करने के लिए तुलसी की माला का प्रयोग किया जाता है। भगवान शिव या किसी भी देवी के मंत्रों का जाप करने के लिए तुलसीमाला का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

चंदन 

चंदन की माला दो रंगों में आती है एक लाल चंदन और श्वेत चंदन। भगवान कृष्ण के मंत्रों के जाप के लिए हमेशा श्वेत चंदन की मालाओं का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा किसी भी देवी के मंत्रों के जाप के लिए लाल चंदनमाला का इस्तेमाल किया जाता है।

रुद्राक्ष 

रुद्राक्ष की माला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका प्रयोग किसी भी मंत्र के जाप के लिए किया जा सकता है। महादेव और उनके परिवार के लोगों के मंत्रों के जाप के लिए रुद्राक्ष का उपयोग करना लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अलावा महामृत्युंजय और लघु मृत्युंजय मंत्र के जाप के लिए सिर्फ रुद्राक्षमाला का ही प्रयोग किया जाना चाहिए।

स्फटिक

स्फटिक-माला को शांति एकाग्रता और संपन्नता की माला माना जाता है। इसका प्रयोग माता सरस्वती और माता लक्ष्मी के मंत्रों के जाप के लिए करना अति शुभकारी होता है इसके साथ ही स्फटिकमाला को धन प्राप्ति और एकाग्रता के लिए भी धारण किया जाता है।

हल्दी 

हल्दी-माला का प्रयोग बृहस्पति देव और मां बगलामुखी के मंत्रों के जाप के लिए किया जाता है। इससे ज्ञान और संतान की प्राप्ति के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। इसके अलावा किसी विशेष मंत्र या मनोकामना पूर्ति के मंत्र के जाप के लिए भी इसी का प्रयोग करनी चाहिए।

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