हर मनोकामना के लिए भोलेनाथ को अर्पित होता है अलग फूल

क्या आप जानते हैं कि महादेव से अपनी अलग-अलग प्रकार की मनोकामनाओं के लिए अलग प्रकार के फूल उन्हें अर्पित किये जाते हैं? तो आइये जानते हैं…

सावन का महीना आते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है। जहाँ देखो बम-बम भोले और हर-हर महादेव के नारे ही गूंजते रहते हैं। धरती का रोम-रोम भक्तिमय हो जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में भोलेनाथ की पूजा अर्चना और व्रत रखने वालों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मन-वांछित फल पाने के लिए सावन के यह व्रत अति पावन माने जाते हैं। साथ ही दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख शांति बनाए रखने के लिए भी ये व्रत लाभकारी होते हैं।

व्रत का महत्त्व

सावन सोमवार के व्रत का एक अलग ही महत्व है। इस दिन व्रत रखने से भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूरे सावन या सावन सोमवार के दिन महादेव का व्रत रखने से ईर्ष्या, अभिमान, क्रोध और लोभ से मुक्ति मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं की मानें, तो सावन सोमवार का व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यह व्रत करने से उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जिनके विवाह में कोई समस्याएं आ रही हो, उन्हें भी सावन में महादेव की पूजा करनी चाहिए और व्रत रखने चाहिए। यदि व्रत संभव न हो तो केवल शिवलिंग पर जल और पुष्प चढ़ा कर महादेव का ध्यान करना भी बहुत होता है।

कौन-से फूल नहीं चढ़ाएं?

किसी भी पूजा में बाकी चीजों की तरह ही फूल भी आवश्य होते हैं। महादेव की पूजा में भी फूल और पत्ती का अपना एक अलग महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भोलेनाथ की पूजा में केवड़ा और केतकी के फूल वर्जित होते हैं। भोलेनाथ को बेल पत्र और धतूरे का फूल अति प्रिय होता है, इसीलिए पूजा में इन्हें अर्पित करने से पूजा संपूर्ण मानी जाती है। जैसा कि सभी जानते हैं, सभी लोगों की अलग-अलग मनोकामनाएं होती है।

कैसे अर्पित करें?

क्या आप जानते हैं कि इन अलग-अलग मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए भोलेनाथ को अलग-अलग फूल अर्पित करने चाहिए। जिनसे वह आपकी इच्छा जान सके और उसके अनुसार आपको वरदान दें। महादेव को कनेर और हरसिंगार, चमेली, बेला, जुही, कमल आदि फूलों को अर्पित करने से वे आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

शिव पुराण में बताया गया है कि महादेव के शिव सहस्त्रनाम या शिव अष्टोत्तरशतनाम नामों का स्मरण करते हुए एक-एक फूल या बेल पत्र भोलेनाथ को अर्पित करने चाहिए। शिवपुराण के अनुसार किसी खास कामना की पूर्ति करने के लिए एक लाख पुष्पों से भोलेनाथ की पूजा करने का प्रावधान है, लेकिन आज के समय में इतने फूलों से पूजा करना संभव नहीं है। इसलिए 1008 या 108 फूल भी भोलेनाथ को पूजा में अर्पित कर सकते हैं।

किस मनोकामना के लिए कौन-सा फूल?

चलिए जानते हैं कि किस मनोकामना के लिए महादेव को कौन सा फूल चढ़ाना चाहिए, जिससे भोलेनाथ हमारी मनचाही इच्छा पूरी कर दें।

बेला

यदि आप सुंदर और सुशील पत्नी या पति की इच्छा रखते हैं तो आपको भगवान भोलेनाथ को बेला का पुष्प अर्पित करने चाहिए। इससे विवाह में आ रही सभी परेशानियां भी दूर होती हैं।

चमेली

वाहन सुख की प्राप्ति आपको भोलेनाथ की पूजा में चमेली का पुष्प अर्पित करना चाहिए।

जूही

यदि भोलेनाथ को जूही के पुष्प अर्पित किए जाएं तो घर में कभी भी अन्न की कमी नहीं रहती ।

धतूरे का फूल

उत्तम पुत्र की प्राप्ति के लिए आपको महादेव को धतूरे का फूल अर्पित करना चाहिए।

कमल या शंख पुष्प

धन और संपत्ति की मानोकामना करने वाले भक्तों को शिव जी की पूजा में कमल या शंख पुष्प ही अर्पित करना चाहिए।

आंकड़े का फूल

शिवजी को लाल और सफेद आंकड़े के फूल अर्पित करने से मोक्ष प्राप्त होता है।

हरसिंगार

भोलेनाथ को हरसिंगार के फूल चढ़ाने से जीवन जे सारे दुख दूर हो जाते हैं और सुख आता है।

लाल डंठल वाले धतूरे का फूल

महादेव को लाल डंठल वाले धतूरे का फूल भी को प्रिय है। इससे भोलेनाथ पर अर्पित करने से वो आपकी मनोकामना को अवश्य पूर्ण करते हैं।

दूर्वा

लंबी उम्र की इच्छा रखने वालों को दूर्वा से भोलेनाथ की पूजा करनी चाहिए।

शमी का फूल

महादेव पर शमी के पत्ते या पुष्प अर्पित करने से भी मोक्ष प्राप्ति की होती है।

ध्यान देने योग्य बातें

भोलेनाथ या किसी भी देवी-देवता को फूल चढ़ाते या कुछ भी अर्पित करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है –
  1. भगवान भोलनाथ या किसी भी पूज्नीय को अर्पित किए जाने वाले पुष्प या कोई भी वस्तु किसी और के बगीचे से बिना पूछे न तोड़े या किसी से उधार न लायें क्योंकि चोरी के पुष्प या बिना किसी की आज्ञा के उसके बगीचे से तोड़े गए फूल पूजा में मान्य नहीं होते।
2. अपने पैसों से खरीदी गई पूजा की सामग्री अपने ईष्ट को अर्पित करने चाहिए।
3. भोलेनाथ जी की पूजा करते समय या कोई भी मनोकामना मांगते समय मन में उनके प्रति पूरी श्रद्धा होनी चाहिए।
4. कोई भी दुर्भावना या संदेह मन में रख कर कोई भी कामना करने से मनोकामना कभी पूर्ण नहीं होती है।

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