आइये, देखिये यूपी की जेलों में योगी जी का “रामराज्य”

(व्यंग्य : देखिये यूपी की जेलों का रामराज्य)

रामराज्य तो जानते ही होंगे आप? देखा नहीं तो सुना तो जरूर होगा। वैसे हमारे यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी का दावा है कि यहाँ रामराज्य आ चुका है। रामराज्य मतलब ऐसा राज्य जहाँ कोई दुखी न हो, न तो अभाव हो और न बुराइयों का प्रभाव हो।

लगता है ये रामराज्य हमारे उत्तम उत्तर प्रदेश की जेलों में भी बखूबी लागू हो चुका है। हमारे यहाँ की जेलों में कोई भी कैदी दुखी नहीं है। किसी भी कैदी को कोई अभाव नहीं है। जिसे जो चाहिए, जेल में बैठे-बैठे मिल रहा है। गुटखा चाहिए, हाज़िर है। सुरती चाहिए, हाज़िर है। सिगरेट-बीड़ी चाहिए, हाज़िर है। दारू चाहिए, हाज़िर है। चखना चाहिए, हाज़िर है। महंगा मोबाइल चाहिए, हाज़िर है। ताश चाहिए, हाज़िर है। गोली चाहिए, हाज़िर है। पिस्तौल चाहिए, हाज़िर है। इसके बाद भी कोई कमी रह जाए, तो वो भी हाज़िर हो जाएगी। आखिर आप रामराज्य में जो जी रहे हैं।

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इसके साथ ही आप जेल में बैठे-बैठे अपने फ़ोन से अपना “बिज़नस” भी चला सकते हैं। कोई आपके इस उत्तम कार्य में बाधा बने तो यहीं से फ़ोन करके उससे मामला सलटा सकते हैं। अगर बात न बने, तो गोलियां और पिस्तौल तो आपको “रामराज्य” में उपलब्ध करवा ही दी गयी हैं। योगी जी, यूपी से दूर एमपी में मौला अली और बजरंगबली का अंतर समझाते हुए वहां भी ऐसा ही रामराज्य लाने का दावा कर रहे हैं।

अरे, क्या आपको ऐसे अपराधियों से डर लग रहा है? नहीं नहीं आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है। आप तो बस हनुमान चालीसा पढ़िए और मस्त रहिए।

वैसे ये कोई पहली बार नहीं है जब यूपी की जेलों में विद्यमान रामराज्य को पूरी दुनिया को सीख देने के लिए सामने लाया गया हो। हमने पहले भी अलग-अलग जेलों से इस रामराज्य का झंडा बुलंद किया है। इसी साल बसन्त के मौसम में बस्ती की जेल से एक शानदार सेल्फी फेसबुक पर अपलोड की गयी। यहाँ रामराज्य को और अधिक समृद्ध बनाने वाले क़त्ल और हथियारों की तस्करी जैसे पावन और पवित्र कार्यों में बन्द दो कैदी बंधुओं ने एक झन्नाटेदार सेल्फी पोस्ट करते हुए कैप्शन में “माफिया” लिखा था। लगता है इन माफियाओं ने जेल प्रशासन को टाफियों की तरह चूसकर निगल लिया है।

बसन्त वाले तो फिर भी सन्त हैं लेकिन इसके बाद फागुन के आम की तरह बौराये हुए मुज़फ्फरनगर जेल के कुछ दिलेर योद्धाओं ने तो फेसबुक पर सेल्फी पोस्ट करते हुए कैप्शन में एक शेर लिखा – “खून में उबाल तो खानदानी है, दुनिया हमारे शौक की नहीं हमारे तेवर की दीवानी है।” मेरा विरोध इनके जेल में सेल्फी लेने और उसे फेसबुक पर डालने का बिलकुल नहीं है। लेकिन इन्होंने इतनी अच्छी और बहादुरी भरी सेल्फ़ी के साथ जो दो कौड़ी की शायरी… या यूँ कहूँ कि तुकबंदी लिखी है, मेरा विरोध उसे लेकर है। इसे पढ़ने के बाद ट्रक के पीछे लिखी जाने वाली लाइनें भी मुझे शेर लगने लगी हैं। अगर इन्हें शेर नहीं सूझ रहा था तो अपने शानदार फ़ोन से मुझे ही कॉल कर लेते।

अच्छा, ई सब छोड़िये। हम लोग आते हैं असली टॉपिक पे।

जो है रामराज्य। जेलों में योगी जी के रामराज्य में कभी-कभी कमी भी सामने आयी, जब यहाँ के कैदियों… या यूँ कहूँ कि निवासियों को कष्ट भी उठाना पड़ा। अभी कुछ दिनों पहले हुई एक घटना ने रामजी को बड़ा दुःखी कर दिया। जब योगी जी द्वारा जेलों में लागू किए गए उनके रामराज्य में उनके “बजरंगी” जो उनके “मुन्ना” जैसे थे, उनकी मौत हो जाती है। लेकिन इसपर हमारे योगी जी का कहना है कि कलयुग के रामराज्य में ऐसी छोटी-मोटी घटनाएँ होना कोई बड़ी बात नहीं है।

बहरहाल, अब खबर का सीरियसली समापन करते हैं। ये वीडियो आने के बाद इसी जेल से एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें इस वीडियो को सामने लाने वाले शार्प-शूटर अंशू दीक्षित ने जेल की सच्चाई बाहर लाने के कारण, जेल प्रशासन, STF और कुछ अन्य कैदियों द्वारा अपनी हत्या की आशंका जताई है। उसने ये भी कहा है कि अगर इस वीडियो के बाद उसकी मौत होती है तो इसके लिए इन सभी पर 302 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। हम शार्प-शूटर अंशू दीक्षित से कहना चाहते हैं कि जब जेल में इतनी मौज थी तो वहां इतना क्रन्तिकारी बनने की क्या जरुरत थी। क्रन्तिकारी, वो भी यूपी की जेलों में, जहाँ CMO तक टॉयलेट में मृत पाए जाते हैं।

रायबरेली के मामले में प्रशासन ने जागरण अवस्था में आते हुए हमेशा की तरह कुछ कार्यवाही कर दी है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक प्रमोद शुक्ला, जेलर और डिप्टी जेलर समेत कुल 6 अधिकारियों पर गाज गिरी है। सभी को Suspend कर दिया गया है। कैदियों का Transfer कर दिया गया है। इन जेल निवासियों पर दारू-चखना आदि सामग्री का मजा लेने के लिए FIR भी दर्ज की गयी है। शासन के अनुसार जेल में छापा मारकर मोबाइल, सिम, सिगरेट, मिठाई, माचिस, लाइटर, ड्राई फ्रूट आदि सुविधा भोगी वस्तुओं को बरामद कर लिया गया है।

कुछ कैदियों… या यूँ कहूँ कि कारागार लोक के निवासियों का कहना है कि उन्हें यह सब सामान दोगुने दामों पर दिया जाता है। इसपर मेरा सरकार से अनुरोध है कि वे कारागार में रामराज्य को कारगर बनाते हुए, इन वस्तुओं को सही दामों पर उपलब्ध करवाएं, जिससे समस्त कैदीगण कम लागत में अधिक मुनाफे का बिज़नस जेल में बैठे-बैठे चला सकें और देश की अर्थव्यवस्था और GDP को बढ़ाने में अपना योगदान दे सकें।

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