भूपेश के आते ही बदलने लगी ‘बस्तर’ की हवा, कामयाब हुए राहुल गाँधी!

भूपेश-राहुल की रणनीति रमन-अमित शाह पर पड़ रही है भारी, राहुल गांधी का मास्टरस्ट्रोक हुआ कामयाब!


छत्तीसगढ़ में चुनाव का समय है, सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पूरी ऊर्जा के साथ मैदान में हैं. जहाँ एक तरफ भाजपा चौथी बार सरकार बनाने को लेकर भरसक प्रयास करती नजर आ रही है वहीं कांग्रेस 15 साल बाद वापसी के लिए मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है.

आक्रामक छवि के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को आखिरी समय में चुनाव प्रचार में उतारकर राहुल गांधी द्वारा चला गया मास्टरस्ट्रोक एक राजनैतिक कुशलता से परिपूर्ण निर्णय साबित होता नजर आ रहा है.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 2 चरणों में चुनाव होने हैं. पहले चरण में नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान होना है जिसके लिए 12 नवम्बर की तारीख निर्धारित की गयी है.
भूपेश बघेल ने चुनाव प्रचार की कमान सम्भालते ही सबसे पहले खुज्जी, डोंगरगढ़ एवं मुख्यमंत्री रमन सिंह जी की स्वयं की विधानसभा राजनांदगांव से शुरुआत की.
                                   
इसके बाद बघेल ने बस्तर दौरे का रुख कर लिया. रविवार के दिन जहाँ खुज्जी में अमित शाह की जनसभा में उम्मीद से बहुत कम भीड़ देखने को मिली, वहीं केशकाल और कांकेर में भूपेश बघेल की जनसभाओं में उनको सुनने के लिए जनसैलाब उमड़ता दिखाई दिया.
सूत्रों की मानें तो अमित शाह की रैली का खुज्जी विधानसभा में असफल होने का कारण भूपेश बघेल की दो दिन पूर्व हुई रैली है.
इतना ही नहीं, भूपेश बघेल की उपस्थिति में रविवार को 300 से भी अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं ने भूपेश की उपस्थिति में कांग्रेस प्रवेश किया.
                             
यह इस बात का प्रतीक है कि केवल कांग्रेसी ही नहीं बल्कि विरोधी पार्टियों के कार्यकर्ता भी भूपेश के कुशल नेतृत्व में भरोसा जता रहे हैं.
बस्तरवासियों का कहना है कि भूपेश के बस्तर दौरे से यहाँ की हवा एकदम से बदल गयी है.
                                       
बस्तर कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है, जिसके चलते भाजपा इस बार सेंध लगाने का भरसक प्रयास करती नजर आ रही थी. मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक समय समय पर यहाँ दौरे करते रहे हैं.
लेकिन भूपेश के इस दौरे से इतना साफ़ हो गया है कि भाजपा अपनी इस रणनीति में असफल होती दिख रही है.
बताते चलें कि अगले हफ्ते यहाँ पर राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की भी जनसभा होनी है, ऐसे में कांग्रेस की तरफ खिसकता जनाधार भाजपा के लिए बेहद मुश्किलें पैदा करने वाला है.
अब यह तो 11 दिसम्बर वाला चुनाव परिणाम का दिन ही तय करेगा, कि कौन अपनी बात पहुँचाने में कामयाब रहा.
लेकिन फ़िलहाल भूपेश-राहुल की जोड़ी अमित शाह- रमन की जोड़ी पर भारी पड़ती दिख रही है.
                                  

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