भाद्रपद पूर्णिमा : शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

भाद्रपद पूर्णिमा
भाद्रपद महीने में आने वाली पूर्णिमा को भाद्रपद पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म भाद्रपद पूर्णिमा का एक विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा होती है। सत्यनारायण का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि भाद्रपद पूर्णिमा का व्रत बहुत ही ज्यादा फलदाई होता है। इस दिन सत्यनारायण की विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना करने और व्रत रखने से जीवन की सभी समस्याओं और दुखों से छुटकारा मिल जाता है।
इसके अलावा जीवन में आ रही किसी भी तरह की आर्थिक परेशानियों से भी मुक्ति मिल जाती है। भगवान सत्यनारायण अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत रखने से अविवाहित कन्या और युवकों का विवाह शीघ्र ही हो जाता है। इसके साथ ही हाथ पर पूर्णिमा के दिन उमा महेश्वर व्रत भी रखा जाता है। इसमें महादेव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। इस साल भाद्रपद पूर्णिमा बुधवार 2 सितंबर को है।
आपको बता दें कि यह पूर्णिमा इसलिए भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इस दिन से पितृपक्ष यानि श्राद्ध की शुरुआत होती है, जो अश्विनी अमावस्या के दिन समाप्त हो जाते हैं। आज हम आपको भाद्रपद पूर्णिमा व्रत के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा के बारे में बताएंगे। यदि आप भी भगवान श्री हरि विष्णु का विशेष आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो 2 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा का व्रत अवश्य रखे। भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा अर्चना विधि-विधान पूर्वक करें। ऐसा करने से भगवान सत्यनारायण आपकी सभी इच्छाएं अवश्य पूर्ण करते हैं।

भाद्रपद पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भागवान सत्यनारायण की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख समृद्धि आती है। भगवान सत्यनारायण की पूजा में केले के पत्ते, फल, पंचामृत, सुपारी, पान, रोली, मोली, तेल, कुमकुम,दूर्वा आदि की जरूरत होती है। जिनसे भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है। इसके अलावा इनकी पूजा में गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा, दूध और शहद मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है। कहते हैं कि पंचामृत भगवान सत्यनारायण को अति प्रिय है। इसके अलावा प्रसाद के रूप में भगवान सत्यनारायण को फल, मिठाई के साथ ही आटे को भूनकर उसमें चीनी मिलाकर पंजीरी बनाई जाती है और फिर इनका भोग लगाया जाता है। तो चलिए अब जानते हैं भाग पर पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि के बारे में…
  1. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा करने और व्रत रखने का संकल्प लेने वाले व्यक्ति को पूरे दिन व्रत रखना चाहिए।
  2. इसके लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनने चाहिए।
  3. फिर पूजा स्थल को गाय के गोबर से लिप कर पवित्र करना चाहिए ।
  4. पूजा के लिए एक चौकी रखनी चाहिए । चौकी को गंगाजल छिड़क कर स्वच्छ करना चाहिए।
  5. चौकी के चारों पायों के पास केले के पत्ते लगाने चाहिए। फिर चौकी पर कपड़ा बिछाकर उसमें सत्यनारायण जी की फोटो या प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
  6. प्रतिमा के आगे फल, फूल और पंचामृत रखना चाहिए। इसके साथ ही भगवान के लिए तैयार किया हुआ भोग भी उनको अर्पित करना चाहिए।
  7. इसके बाद धूप और दीपक जलाकर विधि-विधान पूर्वक भगवान सत्यनारायण की पूजा अर्चना करनी चाहिए।
  8. भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। इसके बाद उनकी आरती करनी चाहिए।
  9. फिर भगवान सत्यनारायण को पंचामृत और प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद घर के सभी सदस्यों को पंचामृत और प्रसाद देना चाहिए।
  10. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए या श्रद्धा अनुसार दान दक्षिणा अवश्य देनी चाहिए।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार नारद मुनि ने भगवान श्री हरि विष्णु से पूछा, कि ‘हे प्रभु, इस मृत्युलोक में हर मनुष्य दुखी रहता है क्या इसका कोई उपाय नहीं है ,जिससे सभी मनुष्य के दुख दूर हो जाए’। तब भगवान विष्णु ने नारद जी से कहा कि, “ना केवल मृत्युलोक में बल्कि स्वर्गलोक में भी ऐसा व्रत है जिससे सभी प्रकार के कष्ट और समस्याएं दूर हो जाती हैं”। नारद मुनि ने श्री हरि विष्णु से इस व्रत के बारे में बताने को कहा।
जिस पर भगवान नारायण ने नारद मुनि को बताया कि, “जो भी मनुष्य या देवता श्री सत्यनारायण का व्रत विधि विधान के साथ करता है उसे जीवन में सुख की प्राप्ति होती है और उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं”। जो भी सत्यनारायण व्रत का अच्छे से पालन कर करता है, उसे जीवन के सभी लौकिक सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। उसके जीवन में आर्थिक समस्याएं कभी नहीं आती और घर परिवार में खुशी का माहौल बना रहता है। फिर नारज मुनि ने मनुष्यों को इस व्रत के बारे में बताया और तभी से मृत्युलोक में भी सत्यनारायण भगवान के व्रत करने का विधान शुरू हुआ।

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