बलराम जयंती : उत्तम संतान प्राप्ति एवं रक्षा हेतु रखें व्रत

बलराम जयंती

9 अगस्त 2020 को बलराम जयंती है। यह हर साल बाद भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। बलराम जयंती को भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार बलराम जी शेषनाग का ही एक अवतार हैं। उन्होंने द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई के रूप में धरती पर जन्म लिया था। आपको बता दें कि बलराम जयंती को हलषष्टि और हरछठ के नाम से भी जाना जाता है। बलराम जी का शस्त्र, हल है और वह हमेशा हल धारण करे हुए ही रहते हैं, इसीलिए उनको हलधर भी कहते हैं।

मान्यता है कि बलराम जयंती के दिन दूध और दही से बनी चीजों का सेवन वर्जित होता है। इस दिन केवल धरती से पैदा होने वाले अन्न का ही सेवन किया जाता है। बलराम जयंती का दिन संतान प्राप्ति के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। यह दिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है। जिन महिलाओं की संतान होती है वह अपनी संतान की रक्षा के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। जिन महिलाओं की अभी तक संतान नहीं है, वह संतान प्राप्ति के लिए बलराम जयंती के दिन व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और बलराम जी की विधि विधान से पूजा करने से संतान संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

बलराम जयंती की कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार एक ग्वालिन गर्भवती थी। उसके प्रसव में थोड़ा ही समय बाकी था। लेकिन अपनी ऐसी स्थिति की परवाह किए बगैर ही वह नगर में दूध और दही बेचने के लिए चली गई। थोड़ी दूर जाने पर ही उसको प्रसव पीड़ा होने लगी, तो वह एक झरबेरी की ओट में चली गई। वहां उसने एक बच्चे को जन्म दिया। कहते हैं उस दिन हलषष्ठी थी। ग्वालिन ने बच्चे को जन्म देने के बाद थोड़ी देर आराम किया। फिर बच्चे को वही लिटाकर आगे चली गई। लेकिन उसका हल सृष्टि का व्रत खंडित हो गया।

ग्वालिन की गलती के कारण झरबेरी के नीचे लेटे उसके बच्चे को गलती से किसान का हल लग गया। वह बच्चा जोर-जोर से रोने लगा। जब किसान ने उस बच्चे की रोने की आवाज सुनी तो वह घबरा गया और उसने झरबेरी के कांटों से टांके लगाकर बच्चे को वही छोड़ दिया। जब ग्वालिन दही- दूध बेचकर वापस लौटी, तो उसने देखा कि उसका बच्चा मृत पड़ा है। अपने बच्चे को ऐसी हालत में देखकर वह फूट-फूट कर रोने लगी। तब उसे ध्यान आया कि उसने हलषष्ठी के दिन दूध और दही बेचने का पाप किया है। जिसके बाद वह, उन सभी लोगों से क्षमा मांगने गई। जिनको उसने दूध और दही बेचा था।

सभी लोगों ने उसकी इस भूल को माफ कर दिया। कहते हैं कि अपनी भूल का पश्चाताप करने के बाद वह ग्वालिन वापस अपने मृत बच्चे को देखने उसके पास पहुंची। उसने वहां देखा कि उसका बच्चा जीवित हो गया है और हंस-खेल रहा है। ये देखकर वह बहुत खुश हुई। उसने अपने पाप के लिए बलराम जी से भी क्षमा मांगी और पुत्र को जीवित करने के लिए उनका धन्यवाद किया।

शुभ मुहूर्त

बलराम जयंती के दिन षष्ठी तिथि का प्रारंभ 9 अगस्त 2020 को सुबह 4:00 बज कर 18 मिनट होकर अगले दिन यानी 10 अगस्त कि सुबह-सुबह 42 मिनट तक रहेगा।

पूजा-विधि

  1. इस दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर महुआ के दातुन से अपने दांत साफ करने चाहिए और उसके बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए।
  2. उसके बाद इस दिन पूरे घर को भैंस के गोबर से लिपना चाहिए। कहते हैं कि बलराम जयंती के दिन ऐसा करने से घर की शुद्धि होती है और सभी नेगेटिव एनर्जी खत्म हो जाती है।
  3. बलराम जयंती के दिन भगवान श्री गणेश और माता गौरी की विधि विधान पूर्वक पूजा करनी चाहिए।
  4. इसके बाद महिलायों द्वारा तालाब के किनारे झरबेरी, पलाश और कांसी का पेड़ लगाने की परंपरा है।
  5. अंत में महिलाएं बलराम जयंती की कथा सुनती या पढ़ती हैं। इसके बाद भगवान श्री गणेश और माता गौरी की आरती करती हैं। फिर अपनी संतान प्राप्ति की मनोकामना भगवान बलराम के सम्मुख रखती हैं और भगवान बलराम उन्हें संतान प्राप्ति का वरदान देते हैं।

व्रत के नियम

जैसा कि सभी जानते हैं बलराम जयंती के दिन संतान प्राप्ति और संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए महिलाएं व्रत रखती हैं। अगर आप भी बलराम जयंती का व्रत रखना चाहती हैं तो इस व्रत के कुछ नियमों का पालन आपको भी करना होगा। तो चलिए आपको बताते हैं कि बलराम जयंती के क्या नियम हैं…

  1. बलराम जयंती के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को महुआ की दातुन जरूर करनी चाहिए।
  2. बलराम जयंती के दिन दूध से बनी किसी भी चीज का सेवन ना करें। ऐसा करना वर्जित माना जाता है।
  3. इस दिन केवल जमीन से पैदा हुए उनका ही किया जाता है।
  4. बलराम जयंती के दिन धरती पर हल चलाना भी वर्जित है। इसीलिए इस दिन खेत में या कहीं भी हल न चलायें और घर के किसी सदस्य को भी ऐसा न करने दें।
  5. इस दिन मूसल का प्रयोग भी वर्जित होता है इसीलिए मूसल का उपयोग भी ना करें।
  6. बलराम जयंती के व्रत रखने के बाद किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए और ना ही किसी से झूठ बोलना चाहिए।
  7. बलराम जयंती के दिन भगवान श्री गणेश माता गौरी और बलराम जी के साथ ही बैल और हल्की भी पूजा करनी चाहिए।
  8. इस दिन खाने में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

बलराम जयंती के दिन इन सभी नियमों का पालन कर, विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। जिससे प्रसन्न होकर, भगवान बलराम आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे।

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