आशुतोष के “सत्य हिंदी” ने फैलाया झूठ

Ashutosh's "Satya Hindi" spreads lies

पत्रकारिता को शर्मसार करते तथाकथित बुध्दिजीवी सीनियर पत्रकार

एक बहुत मशहूर कहावत है कि “माँझी जो नाव डुबोये तो कौन बचाये”, हाल ही में इसी कहावत को चरितार्थ किया है आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता व सीनियर पत्रकार आशुतोष ने। हाल ही में 16 जनवरी को आशुतोष ने एक ट्वीट किया कि फ्रांस ने राफ़ेल का बेहतर विमान जिस दाम पर खरीदा वो आधे से भी है जबकि भारत ने उससे भी कमतर विमान दुगुने से भी ज्यादा दाम पर खरीदे ।

आशुतोष जैसे एक वरिष्ठ पत्रकार का ये ट्वीट तथ्यों से कोषों दूर था जबकि सच ये है कि फ्रांस ने किसी भी नए विमान की खरीद के आदेश नहीं दिये, जिस दाम का दावा आशुतोष ने अपने  ट्वीट में किया वो राफेल के नए F4मॉडल को विकसित करने पर खर्च होनी है। फ्रांस ने जिन 28 विमानों का सौदा किया है वो पुराने अनुबंधों के तहत ही आयेंगे, तथ्यों से खिलवाड़ का ये खेल सिर्फ इस एक ट्वीट तक ही सीमित नहीं था जबकि इसे आशुतोष के “सत्य हिन्दी” नाम के न्यूज़ पोर्टल से भी शेयर किया गया और आँकड़ों को बिना किसी पुख्ता सबूत के पेश किया, जिसे आशुतोष ने बाद में अपने ट्वीट के साथ जोड़कर दिखाया ।

हालाँकि बाद में आशुतोष ने अपने पोर्टल से खबर तो एडिट कर दी लेकिन एक आम आदमी के लिये ऐसे पत्रकारों कि कोई भी बात बहुत मायने रखती है तो प्रश्न अब ये उठता है क्या ऐसे सीनियर पत्रकार अपनी जिम्मेदारी कब समझेंगे। यूँ तो पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है लेकिन लगता है ऐसे कुछ बुध्दिजीवी उस स्तंभ के लिये कहीं न कहीं दीमक का काम कर रहे हैं।

– उमेश शर्मा

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