एलियंस भारत में इन जगहों पर आते हैं

alien mystery

हमारा ब्रह्मांड इतना बड़ा है, जिसकी हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। वैज्ञानिकों का दावा है कि हमारी गैलेक्सी में ही धरती जैसे लाखों ग्रह हैं, जिनमें हमारे जैसे जीवन के होने की संभावनाएं हो सकती हैं। फिर चाहे वे किसी भी रूप में हो, – मनुष्य, पशु-पक्षी या फिर एलियंस । जिनकी खोज में समय-समय पर कई देश अपने यानों को अलग-अलग ग्रहों पर भेजते रहे हैं, लेकिन अभी तक एलियंस या किसी दूसरे जीवन का पता लगाने में असफल रहे हैं।

टेक्नोलॉजी

मनुष्य की प्रवृत्ति हमेशा से ही खोजी रही है। उसे उन चीजों का पता लगाने में हमेशा मज़ा ही आता है, जिसके बारे में कम जानकारी होती है या जानकारी उपलब्ध ही ना हो। एलियंस भी उन्हीं में से एक है। एलियंस यानी यानी दूसरे ग्रह के निवासी। संभव है कि एलियंस हमसे टेक्नोलॉजी और दिमागी तौर पर कई गुना आगे हों, तभी तो शायद आज तक हम उनके बारे में कुछ भी पता लगाने में असमर्थ रहे हैं ।

सिखाया रहने का तरीका

एलियंस पर सदियों से ही मानव जाति की खोज जारी है। सालों से हो रही रिसर्च और वैज्ञानिकों की माने, तो 10 ईसा पूर्व धरती पर एलियन आए थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि एलियंस ने ही शुरुआती दौर में अलग-अलग परंपराओं और समाज की रचना की। उन्होंने इंसानों को रहन- सहन के तरीके सिखाए। वैज्ञानिक और एलियंस के खोजकर्ताओं का मानना है कि दुनिया की तमाम सभ्यताओं जैसे इंका, बेबीलोनिया, सिंधु घाटी, माया, मिस्र और मोहनजोदड़ो जैसी सभ्यताओं के विकास में एलियंस का अहम योगदान था । उन्होंने ही इजराइल, मिस्र, चीन अमेरिका और भारत जैसे देशों में अविश्वसनीय स्मारक, पूजा स्थल और अजूबे बनाएं होंगे, जिन्हें बनाना मनुष्यों के बस की बात नहीं।

गीजा के पिरामिड

प्राचीन सभ्यताओं के स्मारकों पर रिसर्च करने वाले फेमस राइटर एरिक वोन डेनीकेन की एक किताब “चैरियोट्स ऑफ गॉड” ने तो दुनिया की सोच को ही बदल दिया। इस किताब के अनुसार प्राचीन मिस्र के निवासियों के पास गीजा के पिरामिड बनाने की कोई कला या टेक्निक नहीं थी। उनके पास ना तो पिरामिड बनाने के लिए कोई औजार थे और ना ही ज्ञान । इससे ये साबित होता है कि गीजा के पिरामिड का निर्माण करने में एलियंस का ही हाथ है। इतना ही नहीं भारत में भी कई ऐसे मंदिर और स्मारक हैं जिन्हें आज भी आधुनिक मानव तकनीक से बना पाना संभव नहीं है, तो क्या इन सभी के आधार पर यह मान लिया जाए कि एलियन धरती पर आते हैं लेकिन उनके बारे में हमें कुछ पता नहीं चल पाता।

आकाश देव

इजिप्ट, इंका, सिंधु घाटी, बेबीलोनिया, मेसोपोटामिया, सुमेरियन, मोहनजोदड़ो और माया सभ्यता, इन सभी की भाषाएं भले ही अलग हो। लेकिन की भाषाओं में लिखे गए कुछ शब्दों का अर्थ एक ही है । जिसमें लिखा हुआ है कि “जल्द ही लौट आएंगे, हमारे आकाशदेव और फिर भी धरती के मुखिया होंगे”। इतना ही नहीं माया और इजिप्ट सभ्यता के लोगों का मानना था, कि अंतरिक्ष से हमारे जन्मदाता एक दिन धरती पर जरूर लौटेंगे। शायद इसीलिए ही, इन सभ्यताओं के लोग मरने के बाद खुद का मम्मी बनवाते थे। ताकि उनके आकाश देव, उन्हें अंतरिक्ष में ले जाकर दोबारा से जीवित कर सकें। यहां पर आकाशदेव का मतलब से, उनका मतलब एलियंस से तो नहीं है? कई वैज्ञानिकों का दावा है की इनके आकाश देव एलियंस ही थे।

धरती में छिपकर रहते हैं

दुनिया भर के वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती पर दूसरे ग्रहों के लोग यानी कि एलियंस छुप कर रहते हैं। उनके छुपने की सबसे खास जगहों में हिमालय, समुद्री सुरंगे, गुफाएं और घने जंगल हैं। जहां मनुष्य बहुत कम ही जाते हैं या पहुंच ही नहीं पाते।अमेरिका, रसिया, चाइना और इसी तरह कई और देशों के वैज्ञानिकों का दावा है कि एलियंस हमारी धरती की सैर करने आते रहते हैं। दुनिया में बहुत सी ऐसी जगह मौजूद है, जहां पर एलियंस को देखे जाने की बात सामने आई हैं। भारत भी इन्हीं में से एक है । भारत में भी कई जगहों पर एलियंस या उनक के यान को देखे जाने का दावा किया गया है। तो चलिए जानते हैं कि भारत में वह कौन सी जगहें हैं , जहां पर एलियंस आए थे या आज भी आते हैं।

हिमालय है ‘एलियंस का अड्डा’

हिमालय से जुड़े कई रहस्यमयी घटनाएं हैं, उनमें से एक 2010 की है जिसमें जम्मू कश्मीर और हिमालय के आस पास वाले इलाकों में एलियंस की उड़नतश्तरी को देखे जाने का दावा किया गया था। इसके अलावा दूसरी घटना 2011 की है जब एक भारतीय सेना के ऑन ड्यूटी जवान ने भी एक अजीब यान आकाश में देखा था।

छत्तीसगढ़ की गुफाओं में

छत्तीसगढ़ के बस्तर में बहुत सी ऐसी गुफाएं हैं, जिनका इतिहास बहुत पुराना है। इन गुफाओं में कई तरह के शैल चित्र बने हुए हैं। जिनमें उड़नतश्तरी भी बनी हुई है। कुछ शैल चित्रों में उड़नतश्तरी से अजीबोगरीब जीवो को निकलते हुए भी दिखाया गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि उड़नतश्तरी से निकलते यह अजीबोगरीब जीव एलियंस ही है।उनका मानना है कि यह शैल चित्र करीब 10000 साल पुराने हैं, तो हो सकता है कि उस समय यहां एलियंस आए होंगे जिन्होंने यह शैल चित्र बनाए हों।

बनाई द्वारका नगरी

इसके अलावा वैज्ञानिकों का दावा है कि गुजरात की द्वारिका को भी एलियंस ने ही बनाया था, जबकि द्वारका एक हिंदू तीर्थ स्थल है। जिसे भगवान कृष्ण की नगरी के रूप में जाना जाता है। जो एक समय के बाद पानी में डूब गई थी। लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि यह एलियंस द्वारा बनाई गई एक सिटी थी। जिसे एलियंस ने यहां से जाते समय पानी में डूबा दिया था। समुद्र के नीचे डूबी द्वारका में बनी कई कलाकृतियों को देख कर ये कहना गलत न होगा, कि प्राचीन काल में इस तरह की कलाकारी करना मनुष्यों के लिए आसान नहीं था।

आज भी एलियंस की खोज जारी

सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि एलियनस धरती पर कई बार आ चुके हैं। इसका दावा नासा के कंप्यूटर साइंटिस्ट और प्रोफेसर सिल्वानो पी कोलंबानो भी कर चुके हैं। उनका कहना है कि एलियंस का दिमाग इंसान की तुलना में कई गुना तेज है। उनके पास ऐसी अनोखी तकनीक है जिसकी हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते। एलियंस आज भी सभी के लिए किसी रहस्य से कम नहीं है इस पर वैज्ञानिकों की खोज लगातार जारी है।

आपको क्या लगता है क्या कभी धरती पर एलियन आये होंगे? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here